सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को रियल एस्टेट की दिग्गज कंपनी सुपरटेक को अपनी चीजें व्यवस्थित करने के लिए कहा। नोएडा में 40 मंजिला ट्विन टावरों के फ्लैट खरीदारों को रकम वापस नहीं किए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद नाराजगी जताते हुए सुपरटेक को 17 जनवरी तक रकम वापस करने के लिए कहा है। मालूम हो कि शीर्ष अदालत ने पिछले वर्ष सात अगस्त को ट्विन टावरों की ध्वस्त करने का निर्देश दिया था।
फ्लैट खरीदारों ने सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की
दरअसल, कुछ फ्लैट खरीदारों ने सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि सुपरटेक ने उन्हें अपने पैसे लेने के लिए आमंत्रित किया लेकिन जब उन्होंने कंपनी से संपर्क किया तो उन्हें बताया गया कि पैसा कुछ कटौतियों के साथ किस्तों में भुगतान किया जाएगा जबकि न्यायालय द्वारा इस तरह की कटौती की बात नहीं कही थी।
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने बुधवार को सुपरटेक के वकील से कहा, हम आपके निदेशकों को अभी जेल भेज देंगे। वे सुप्रीम कोर्ट के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। निवेश की वापसी पर ब्याज नहीं लगाया जा सकता है। आप अदालत के आदेश का पालन नहीं करने के लिए सभी प्रकार के कारणों की तलाश कर रहे हैं। सुनिश्चित करें कि भुगतान सोमवार (17जनवरी) तक हो जाए। आप अपनी चीजें व्यवस्थित कर लीजिए अन्यथा परिणाम भुगतने होंगे।
दो टावरों को गिराने का दिया था आदेश
साथ ही शीर्ष अदालत ने नोएडा प्राधिकरण को उस एजेंसी का नाम बताने के लिए कहा है जो नोएडा एमराल्ड कोर्ट हाउसिंग प्रोजेक्ट के ट्विन टावरों को गिराने का काम करेगा। नोएडा प्राधिकरण को 17 जनवरी तक इस बारे में बताने के लिए कहा गया है। सुप्रीम कोर्ट ने 31 अगस्त 2021 को इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा पारित उस आदेश को बरकरार रखा था, जिसमें भवन मानदंडों के उल्लंघन के लिए सुपरटेक के नोएडा एक्सप्रेस स्थित एमराल्ड कोर्ट प्रोजेक्ट के 40 मंजिले ट्विन टावर-16 (अपेक्स) और 17 (स्यान) को ढहाने का आदेश दिया गया था।
फ्लैट खरीदारों को ब्याज के साथ राशि वापस करने का निर्देश
सुपरटेक को तीन महीने के भीतर टावरों को गिराने का कार्य पूरा करने का निर्देश दिया गया था। ढहाने का कार्य नोएडा के अधिकारियों की देखरेख में होने की बात कही गई थी। सुपरटेक को इस मद होने वाले खर्च का वहन करने के लिए कहा गया था। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने सुपरटेक को दो महीने के भीतर ट्विन टावरों के फ्लैट खरीदारों को 12 फीसदी प्रति वर्ष ब्याज के साथ राशि वापस करने का निर्देश दिया था। इसके अलावा कोर्ट ने बिल्डर को एक महीने के भीतर एमरॉल्ड कोर्ट ओनर रेजिडेंट्स वेलफेयर असोसिएशन को हर्जाने के तौर पर दो करोड़ रुपये का भुगतान करने का भी निर्देश दिया था।