उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में एक महिला की संदिग्ध स्थिति में हुई मौत मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। कोर्ट ने मामले में एक व्यक्ति के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले को खारिज कर दिया। साथ ही उत्तर प्रदेश के डीजीपी को सहारनपुर जिले में एक महिला की मौत की जांच के लिए एक विशेष जांच दल गठित करने का निर्देश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश
मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि पुलिस अधिकारियों ने महिला के रिश्तेदारों के बयान दर्ज करके ही अपीलकर्ता के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर दिया, जो आश्चर्यजनक है। मामले में पीठ ने कहा कि आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में जांच एजेंसियों को संवेदनशील बनाया जाना चाहिए ताकि किसी व्यक्ति को पूरी तरह से अस्थिर अभियोजन की प्रक्रिया के दुरुपयोग का नुकसान न उठाना पड़े।
यूपी डीजीपी को एसआईटी गठित करने का आदेश
अदालत ने उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को निर्देश दिया है कि वे सहारनपुर जिले में एक महिला की संदिग्ध स्थिति में हुई मौत की जांच के लिए एक विशेष जांच दल गठित करें। इस जांच रिपोर्ट को आज से दो महीने की अवधि के भीतर सीलबंद लिफाफे में इस अदालत के समक्ष पेश किया जाना है।
एक नजर पूरे मामले पर
बता दें कि सहारनपुर पुलिस ने 2022 में एक युवक की कथित तौर पर पीट-पीटकर हत्या करने के आरोप में 20 वर्षीय महिला के चार परिजनों पर मामला दर्ज किया था। अस्पताल में इलाज के दौरान युवक की मौत के कुछ घंटों बाद महिला ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली।
पुलिस के अनुसार, महिला और 20 वर्षीय युवक पड़ोसी थे और कथित तौर पर एक-दूसरे के साथ रिलेशनशिप में थे। जांच अधिकारी ने कहा था कि जिया-उर-रहमान की पोस्टमार्टम रिपोर्ट से यह निष्कर्ष निकला है कि उसकी मौत मृत्यु-पूर्व चोटों के कारण हुई।