सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को वादी को बताए बिना कोर्ट में याचिका दायर करने के मामले में सीबीआई जांच के आदेश दिए। न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने भगवान सिंह की याचिका पर सुनवाई की। याचिकाकर्ता भगवान सिंह ने कोर्ट में कहा कि वह कभी भी याचिका दायर करने वाले वकीलों से नहीं मिले। उन्होंने न ही वकीलों को याचिका दायर करने के लिए कहा था। कुछ पार्टियों ने वकीलों की मदद से कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग और न्याय की धारा को बदनाम करने की कोशिश की।
सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि हम मामले की जांच सीबीआई को सौपते हैं। सीबीआई मामले की प्रारंभिक जांच के बाद इसमें शामिल सभी आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करेगी। साथ ही ऐसे मामले में कथित अपराधों और अदालत में धोखाधड़ी के सभी लिंक की जांच करेगी। सीबीआई निदेशक मामले में आवश्यक कार्रवाई करने के साथ दो महीने के भीतर अदालत को रिपोर्ट सौपेंगे।
अदालत ने कहा कि वकील अदालत के जिम्मेदार अधिकारी और न्याय व्यवस्था के अहम अंग होते हैं। मामला तब गंभीर चिंता का विषय बन जाता है जब वकील, ऐसे मामलों में शामिल होते हैं और बेईमान वादियों की मुकदृमेबाजी में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं। अदालत ने कहा कि लोग न्यायपालिका में बहुत विश्वास रखते हैं। वहीं बार को न्याय की स्वतंत्रता और देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को बनाए रखने के लिए बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। कोर्ट ने कहा कि मौजूदा समय में नैतिक मूल्यों के ह्रास और पेशेवर नैतिकता का ह्रास होने से कदाचार के मामले बढ़ रहे हैं। अदालत में की जाने वाली कार्यवाही से बहुत पवित्रता जुड़ी होती है।
कोर्ट ने कहा कि हर वकील वकालतनामा और अदालतों में दाखिल किए जाने वाले दस्तावेजों पर अपने हस्ताक्षर करता है और वकील को अदालत में याचिका दायर करने और पूरी जिम्मेदारी के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज करने के लिए माना जाता है। जब सुप्रीम कोर्ट की बेंच और बार बेहतरीन कानूनी दिमाग देश के लिए सर्वोत्तम कानून बनाने में व्यस्त हैं, लेकिन बेईमान वादियों का एकगुट कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग करने में व्यस्त है। यह अदालतों के साथ-साथ संपूर्ण कानूनी बिरादरी और कानूनी पेशे की छवि को नुकसान पहुंचाता है।
अदालत ने कहा कि गलत काम करने वालों को कानून का डर होना चाहिए कि उन्हें दंडित किया जाएगा और निर्दोषों को यह आश्वासन दिया जाना चाहिए कि उन पर मुकदमा नहीं चलाया जाएगा। पीड़ितों को भरोसा होना चाहिए कि उन्हें न्याय मिलेगा। अदालतों में धोखाधड़ी करके कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग करने के बेशर्म प्रयास किए जा रहे हैं। इससे निपटने की जरूरत है।