मनी लॉन्ड्रिंग (धनशोधन) मामले में झारखंड की निलंबित आईएएस अधिकारी पूजा सिंघल की याचिका पर ईडी को नोटिस जारी किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने यह नोटिस निलंबित आईएएस अधिकारी पूजा सिंघल की उस याचिका पर जारी किया है, जिसमें उन्होंने अपनी बीमार बेटी की देखभाल के लिए अंतरिम जमानत की मांग की थी। जस्टिस एस के कौल और अभय एस ओका की पीठ ने सुनवाई करते हुए ईडी और अन्य से इस मामले में जवाब मांगा है।
पीठ ने जवाब दाखिल करने के लिए ईडी को जनवरी 2023 में अदालत के दोबारा खुलने तक का समय दिया है। इसके साथ ही पीठ ने यह भी कहा कि इस बीच, प्रतिवादी याचिकाकर्ता की बेटी की चिकित्सा स्थिति का जांच करके अदालत को सूचित करे। मामले में सुनवाई के दौरान पूजा सिंघल की ओर से पेश वकील ने कहा कि उनके मुवक्किल की बेटी की चिकित्सीय स्थिति के कारण देखभाल की जरूरत है और इस आधार पर जमानत मांगी गई थी।
इस पर शीर्ष अदालत ने जांच एजेंसी ईडी से उसकी बेटी की स्थिति की पुष्टि करने और पीठ को सूचित करने के लिए कहा है। गौरतलब है कि शीर्ष अदालत झारखंड कैडर की भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) की अधिकारी सिंघल की जमानत याचिका खारिज करने के झारखंड उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई कर रही थी।
प्रवर्तन निदेशालय ने राज्य के खनन विभाग की पूर्व सचिव पूजा सिंघल पर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाया है। इस मामले में एक सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, एक डायग्नोस्टिक सेंटर और जेल में बंद झारखंड की आईएएस अधिकारी पूजा सिंघल की 82.77 करोड़ रुपये की दो जमीनें मनी लॉन्ड्रिंग रोधी कानून के तहत कुर्क की गई हैं।
जब्त की गई संपत्तियों में पल्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, इसी नाम का डायग्नोस्टिक और इमेजिनिंग सेंटर और रांची में स्थित दो भूखंड शामिल हैं। 2000 बैच की भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी सिंघल को मनरेगा योजना में कथित अनियमितताओं से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में 11 मई को प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार किया था।