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SC ने केंद्र और मुफ्ती सरकार पर लगाया जुर्माना

Tue, 03 Jan 2017 05:18 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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जम्मू-कश्मीर में सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सभी अल्पसंख्यक समुदायों को देने की गुहार संबंधी याचिका पर जवाब न दाखिल करने पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार पर 15-15 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
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केंद्र और जम्मू-कश्मीर सरकार ने पिछली सुनवाई पर जवाब दाखिल करने के लिए वक्त मांगा था। सोमवार को केंद्र और राज्य सरकार ने जवाब दाखिल करने के लिए और वक्त देने की गुहार की। इस बात से नाराज चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने दोनों पर जुर्माना लगा दिया। 

अंकुर शर्मा द्वारा दाखिल याचिका में कहा गया है कि धर्म और भाषा के आधार पर अधिसूचना जारी कर राज्य के सभी अल्पसंख्यकों तक सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने का निर्देश दिया जाना चाहिए। याचिका में जम्मू-कश्मीर में मुस्लिमों को अल्पसंख्यक का दर्जा दिए जाने पर आपत्ति जताई गई है। 
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अल्पसंख्यक का दर्जा राज्यवार तरीके से होना चाहिए

पिछली सुनवाई में याचिकाकर्ता की ओर से पक्ष रखा गया था कि जम्मू-कश्मीर में मुस्लिमों की आबादी करीब 67 फीसदी है, लिहाजा राज्य में मुस्लिम अल्पसंख्यक नहीं, बल्कि बहुसंख्यक हैं। बावजूद इसके उन्हें अल्पसंख्यकों वाले फायदे मिल रहे हैं, जबकि दूसरे अल्पसंख्यक इन फायदों से महरूम हैं। यह उन लोगों के मूल अधिकारों का हनन है, जो सही मायने में इसके हकदार हैं।
 
याचिका में कहा गया है कि तकनीकी पेशेवर शिक्षा के क्षेत्र के लिए वर्ष 2007-2008 में केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर अल्पसंख्यकों के लिए 20 हजार छात्रवृत्ति देने की बात कही थी। इसके तहत जम्मू-कश्मीर में दी जाने वाली कुल 753 छात्रवृत्तियों में से 717 मुस्लिमों को दी गई, जबकि ईसाई समुदाय को दो, सिखों को 22 और बौद्ध धर्म के लोगों को 12 छात्रवृत्तियां दी गईं। साथ ही याचिका में यह भी कहा गया है कि अब तक न तो जम्मू-कश्मीर में अल्पसंख्यक आयोग है और न ही राज्य अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम ही बना है। 

याचिकाकर्ता का कहना है कि अल्पसंख्यक का दर्जा राज्यवार तरीके से होना चाहिए, क्योंकि भले ही किसी समुदाय की जनसंख्या देशभर में अधिक हो, लेकिन किसी राज्य में उनकी संख्या कम हो तो उसे अल्पसंख्यक का दर्जा मिलना चाहिए।
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