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Supreme Court: ' जमानत की शर्तें सख्त होना उचित नहीं', सुप्रीम कोर्ट ने कहा- मामले की गंभीरता पर तय हो शर्त

Mon, 23 Jun 2025 06:17 PM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

मद्रास हाईकोर्ट के जमानत की शर्तों को लेकर दायर एक याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि जमानत देते समय बहुत सख्त और बोझिल शर्तें नहीं लगाई जानी चाहिए, क्योंकि बहुत ज्यादा सख्त जमानत, जमानत नहीं मानी जाती है। लेकिन ऐसी शर्तों को पूरी तरह गलत ठहराना भी सही नहीं होगा।

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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने जमानत की शर्तों को लेकर अहम टिप्पणी की है। इसके तहत कोर्ट ने कहा कि जमानत देते समय बहुत सख्त और बोझिल शर्तें नहीं लगाई जानी चाहिए, क्योंकि बहुत ज्यादा सख्त जमानत, जमानत नहीं मानी जाती है। लेकिन ऐसी शर्तों को पूरी तरह गलत ठहराना भी सही नहीं होगा, क्योंकि यह हर मामले के तथ्यों और परिस्थितियों पर निर्भर करता है। मामले में न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने यह टिप्पणी एक याचिका पर सुनवाई के दौरान की, जब एक व्यक्ति ने मद्रास हाईकोर्ट द्वारा लगाई गई जमानत की शर्तों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।

13.73 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी का मामला

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बता दें कि ये मामला एक कारोबारी से जुड़ा है, जिस पर जीएसटी कानून के तहत 13.73 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी का आरोप है। उसे 27 मार्च को गिरफ्तार किया गया था और उसने जमानत के लिए हाईकोर्ट में अर्जी दी थी। इसके बाद 8 मई को हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान उसके वकील ने बताया कि उसने पहले ही 2.86 करोड़ रुपये जमा कर दिए हैं और वह किसी भी कड़ी शर्त का पालन करने को तैयार है। वकील ने यह भी कहा कि वह जमानत मिलने के 10 दिन के भीतर 2.50 करोड़ रुपये और जमा कर देगा।

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हाईकोर्ट ने जमानत के लिए दी ये शर्त

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हाईकोर्ट ने उसे 50 लाख रुपये जमा कराने की शर्त पर जमानत दी और 10 लाख रुपये के मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया। बाद में 14 मई को हाईकोर्ट ने शर्त में बदलाव करते हुए उसे जमानत मिलने के 10 दिन के भीतर पूरा 2.50 करोड़ रुपये जमा कराने की छूट दे दी।

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर जताई नाराजगी
इसके बाद याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की और कहा कि इतनी बड़ी रकम जमा करने की शर्त अनुचित है। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर नाराजगी जताई कि पहले हाईकोर्ट में वकील ने खुद पैसे जमा करने की पेशकश की और बाद में सुप्रीम कोर्ट में आकर कहा कि वकील को यह कहने का अधिकार नहीं था।

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सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को रखा बरकरार
इसके साथ ही कोर्ट ने इस प्रवृत्ति की कड़ी आलोचना की। साथ ही  कहा कि इस तरह की पेशकश से अदालत की प्रक्रिया पर असर पड़ता है। कोर्ट ने कहा कि यदि यह पेशकश नहीं की जाती, तो हाईकोर्ट केस की मेरिट पर विचार करता। आखिर में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के 14 मई के आदेश को बरकरार रखते हुए कहा कि याचिकाकर्ता को जमानत की शर्त के अनुसार 2.50 करोड़ रुपये 10 दिन में जमा करने होंगे।

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