सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम समाज में ट्रिपल तलाक और पुरुषों को चार शादियों की इजाजत की व्यवस्था पर सुनवाई 12 हफ्ते के लिए टल गई है। इस तहर कोर्ट ने केंद्र समेत सभी पक्षों को जवाब दाखिल करने के लिए वक्त दे दिया है। कोर्ट ने संकेत दिया है कि अगर जरूरी लगा तो मामले को बड़ी बेंच को भेजा जा सकता है।
केंद्र सरकार ने अपना जवाब दाखिल करने के लिए कोर्ट से 3 हफ्ते का समय मांगा था। इस पर कोर्ट ने बाकी पक्षों की मांग को ध्यान में रखते हुए सुनवाई 12 हफ्ते के लिए मुल्तवी कर दी है। कोर्ट ने टीवी में इस बारे में चर्चा को रोकने की मांग को मानने से फिलहाल मना कर दिया। एक याचिककर्ता फरहा फैज ने अदालत में दलील दी थी कि मुस्लिम उलेमा, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और कुछ और संगठन मुस्लिम समाज को भ्रम में डालने की कोशिश कर रहे हैं।
याचिकाकर्ताओं के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। याचिकाकर्ता का कहना था कि जिस तरह बाबरी मस्जिद मामले में कोर्ट ने टीवी डिबेट पर पाबंदी लगाई थी उसी तरह ट्रिपल तलाक को लेकर दिखाए जा रहे कार्यक्रमों पर रोक लगे। कोर्ट ने कहा कि हम आपकी अर्जी को खारिज नहीं कर रहे लेकिन हम एकतरफा रोक नहीं लगा सकते। यह एक महत्वपूर्ण मसला है और समाज के सभी वर्गों को इस पर अपनी राय रखने का हक है। अगर मामला हाथ से बाहर चला गया तब हम इस मामले पर विचार करेंगे।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए तीन बार तलाक के मामले को एक जनहित याचिका में बदल दिया था। इस मामले में अब तक कुल चार जनहित याचिका आ चुकी है। कोर्ट ने सभी याचिकाओं को एक साथ संलग्न कर दिया है। सभी याचिकाओं पर अब 6 सितंबर को सुनवाई होगी।