न्यायमूर्ति मुरलीधरन की पीठ ने 27 मार्च को मणिपुर सरकार को आदेश दिया था कि वह मैतई संगठन के उस प्रतिवेदन पर विचार करे, जिसमें अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मांग की गई है। इस आदेश बारे में कहा जा रहा है कि यह राज्य में जातीय संघर्ष का तात्कालिक कारण था। घाटी में एक तरफ मैतई रहते हैं और दूसरी तरफ पहाड़ियों में कुकी और अन्य आदिवासी रहते हैं।
न्यायमूर्ति मुरलीधरन ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह बहुसंख्यक मैतई समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने के लिए प्रतिवेदन पर विचार करे और चार सप्ताह के भीतर केंद्र को पत्र लिखे।
न्यायमूर्ति संजय किशन कौल, न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की सदस्यता वाले कॉलेजियम ने न्यायमूर्ति मुरलीधरन के इस अनुरोध को खारिज कर दिया कि उन्हें कलकत्ता स्थानांतरित करने के बजाय मद्रास उच्च न्यायालय में स्थानांतरित किया जाए या मणिपुर उच्च न्यायालय में काम जारी रखने की अनुमति दी जाए।
नौ अक्तूबर, 2023 को कॉलेजियम ने न्याय के बेहतर प्रशासन के लिए मणिपुर उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एम वी मुरलीधरन को कलकत्ता उच्च न्यायालय में स्थानांतरित करने का प्रस्ताव दिया।
इसमें कहा गया, 'मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर के संदर्भ में हमने उच्चतम न्यायालय के एक न्यायाधीश से परामर्श किया है जो मणिपुर उच्च न्यायालय के मामलों से परिचित होने के कारण प्रस्तावित तबादले पर विचार देने की स्थिति में हैं।'
मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाले कॉलेजियम ने कहा कि उसने न्यायमूर्ति मुरलीधरन के अनुरोध पर विचार किया लेकिन उसे इसमें कोई दम नजर नहीं आया।
इसमें कहा गया, 'इसलिए कॉलेजियम न्यायमूर्ति एम वी मुरलीधरन को कलकत्ता उच्च न्यायालय में स्थानांतरित करने की नौ अक्तूबर की अपनी सिफारिश को दोहराने का संकल्प करता है।'