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SC: मद्रास HC में होगी स्थायी जज की नियुक्ति, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने की जज गौरी समेत पांच नामों की सिफारिश

Tue, 10 Sep 2024 11:47 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कॉलेजियम ने जस्टिस लक्ष्मना चंद्र विक्टोरिया गौरी, पिल्लईपक्कम बहुकुटुम्बी बालाजी, कंधासामी कुलंदावेलु रामकृष्णन, रामचंद्रन कलाईमथी और के गोविंदराजन थिलाकावडी के नाम की सिफारिश की है। 
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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मद्रास हाईकोर्ट में जल्द से जल्द स्थायी न्यायाधीश की तैनाती होगी। सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम ने मंगलवार को मद्रास हाईकोर्ट के स्थायी न्यायाधीश पद के लिए न्यायमूर्ति लक्ष्मना चंद्र विक्टोरिया गौरी समेत पांच जजों नाम की सिफारिश की। 

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मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और बीआर गवई की तीन सदस्यीय शीर्ष अदालत कॉलेजियम ने अदालत के स्थायी न्यायाधीश की नियुक्ति के लिए तीन महिलाओं सहित पांच अतिरिक्त न्यायाधीशों के नामों की सिफारिश करते हुए प्रस्ताव पारित किया। कॉलेजियम ने जस्टिस लक्ष्मना चंद्र विक्टोरिया गौरी, पिल्लईपक्कम बहुकुटुम्बी बालाजी, कंधासामी कुलंदावेलु रामकृष्णन, रामचंद्रन कलाईमथी और के गोविंदराजन थिलाकावडी के नाम की सिफारिश की है। 

शीर्ष अदालत ने मद्रास उच्च न्यायालय कॉलेजियम के 29 अप्रैल 2024 के प्रस्ताव पर ध्यान दिया। इसमें भी इन पांच अतिरिक्त न्यायाधीशों के नामों की सिफारिश की गई थी। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और राज्यपाल इस सिफारिश से सहमत हैं। प्रस्ताव के आधार पर कॉलेजियम ने माना कि पांचों जज स्थायी न्यायाधीश के रूप में नियुक्त होने के लिए उपयुक्त हैं।
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वहीं एक प्रस्ताव में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के रूप में नियुक्ति के लिए तीन न्यायिक अधिकारियों के नामों की भी सिफारिश की। इसमें न्यायिक अधिकारी आर पूर्णिमा, एम जोथिरामन और डॉ. ऑगस्टिन डेवाडोस मारिया क्लेट को मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने की सिफारिश की गई। 

पिछले साल उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में न्यायमूर्ति गौरी की नियुक्ति के बाद विवाद हुआ था। अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में उनकी पदोन्नति से पहले बार के सदस्यों ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर उनके नफरत भरे भाषणों और भारतीय जनता पार्टी से जुड़ाव के बारे में जानकारी दी थी।

पिछले साल सात फरवरी को शीर्ष अदालत ने गौरी को मद्रास उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में शपथ लेने से रोकने की मांग करने वाली याचिकाओं पर विचार करने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि नियुक्ति के लिए कॉलेजियम द्वारा उनके नाम की सिफारिश करने से पहले परामर्शी प्रक्रिया हुई थी।
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