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सुप्रीम कोर्ट का निर्देश: अफगानिस्तान में हिरासत में ली गई महिला और बेटी के प्रत्यर्पण पर फैसला करे केंद्र

Mon, 03 Jan 2022 04:31 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

आरोपी शख्स ने एशियाई देशों के खिलाफ युद्ध छेड़ने में आतंकवादी संगठन आईएसआईएस का प्रचार करने की साजिश रची थी।
 
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ani
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र को निर्देश दिया कि वह केरल के एक व्यक्ति के प्रतिनिधित्व पर फैसला करे जिसने अपनी बेटी और नाबालिग पोती के प्रत्यर्पण और प्रत्यावर्तन के लिए निर्देश देने की मांग की है और वर्तमान में अफगानिस्तान की पुल-ए-चरखी जेल में बंद है। न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति बी आर गवई की पीठ ने केंद्र को आठ सप्ताह के भीतर वीजे सेबेस्टियन फ्रांसिस की याचिका पर फैसला करने का निर्देश दिया।

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अपनी याचिका में एर्नाकुलम जिले के निवासी फ्रांसिस ने कहा कि उनकी बेटी पर भारत में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) और अन्य अपराधों के तहत मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि आरोप यह है कि उनके दामाद ने उनकी बेटी और अन्य आरोपी व्यक्तियों के साथ एशियाई देशों के खिलाफ युद्ध छेड़ने में आतंकवादी संगठन आईएसआईएस का प्रचार करने की साजिश रची थी।

शुरुआत में फ्रांसिस के वकील ने कहा कि तालिबान के अफगानिस्तान पर कब्जा करने से पहले याचिका पिछले साल जुलाई में दायर की गई थी। तालिबान ने पिछले साल अगस्त में देश पर कब्जा कर लिया था। उन्होंने कहा कि हालांकि तालिबान के सत्ता में आने के बाद जेलों को तोड़ा गया, लेकिन यह नहीं कहा जा सकता कि फ्रांसिस की बेटी और पोती हिरासत में नहीं हैं, क्योंकि अफगानिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में कैदियों को हिरासत में लिए जाने की खबरें हैं।

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