दिल्ली में भारी वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को उचित कदम उठाने का निर्देश दिया। कोर्ट का ये आदेश दिल्ली हाईकोर्ट के 2006 के फैसले के खिलाफ दायर अपील को खत्म करते हुए दिया, जिसमें शहर की बाहरी रिंग रोड के भीतर ट्रकों के प्रवेश पर 24 घंटे का प्रतिबंध लगाया गया था।
राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में भारी वाहनों की आवाजाही हमेशा से ही एक बड़ी समस्या के तौर पर रही है। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को दिल्ली सरकार से राष्ट्रीय राजधानी में भारी वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाने को कहा है। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने यह आदेश दिल्ली उच्च न्यायालय के 2006 के फैसले के खिलाफ दायर अपील का निपटारा करते हुए दिया। बता दें कि दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले में शहर के बाहरी रिंग रोड के भीतर ट्रकों के प्रवेश पर 24 घंटे का प्रतिबंध लगाया गया था, खासकर माल लोड और अनलोड करने के लिए।
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सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने मामले में टिप्पणी करते हुए कहा कि भले ही इस अपील का निपटारा हो गया है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि दिल्ली सरकार को भारी वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए जरूरी कदम नहीं उठाने चाहिए। अगर अभी तक इस संबंध में कोई कदम नहीं उठाए गए हैं, तो राज्य सरकार उचित निर्णय लेगी।
ट्रांसपोर्टस एसोसिएशन ने कोर्ट से की थी अपील
दिल्ली हाईकोर्ट के द्वारा फैसले पर रोक के बाद दिल्ली गुड्स ट्रांसपोर्टर्स एसोसिएशन ने कोर्ट में यह कहा था कि इस प्रतिबंध से व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। इसके बाद मामल में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 2006 में ही इस आदेश पर रोक लगा दी थी, और अब इस मामले दिल्ली सरकार को नई दिशा-निर्देश जारी करने का आदेश दिया है।
एक नजर दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर
गौतरतलब है कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने 2006 में आदेश दिया था कि ट्रकों को दिल्ली के बाहरी रिंग रोड, सदर बाजार और कुतुब रोड जैसे इलाकों में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। इसके साथ ही दिल्ली के थोक बाजारों में ट्रकों के प्रवेश पर भी रोक लगा दी थी, और इन भीड़-भाड़ वाले इलाकों में लोडिंग और अनलोडिंग पर भी प्रतिबंध लगा दिया था। साथ ही कोर्ट ने सख्त निर्देश दिए थे कि यदि इस आदेश उल्लंघन होता है तो दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) द्वारा संबंधित स्थान को सील कर दिया जाता।