केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि राष्ट्रगान के सम्मान के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता। अदालत ने एक याचिका पर सरकार का जवाब मांगा था जिसमें राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत को स्कूल और कॉलेजों में अनिवार्य करने की मांग की गई थी।
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सुनवाई की शुरुआत में ही एडिशनल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि राष्ट्रीय गान और अन्य राष्ट्रीय प्रतीकों का हर सभ्य और सुसंस्कृत देश में सम्मान किया जाता है।
सामाजिक कार्यकर्ता श्याम नारायण चौकसे ने अदालत से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की थी जिससे कोई भी व्यक्ति राष्ट्रगान का अनादर न कर पाए। उन्होंने कहा कि अगर सरकार इस संबंध में नियम तैयार करती है तो उनको याचिका वापस लेने में खुशी होगी।
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वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी के माध्यम से चौकसे ने दावा कि हालांकि राष्ट्रध्वज का अपमान करना एक अपराध है, फिर भी राष्ट्रगान के संबंध में कोई ऐसा नियम या कानून नहीं है।
इस पर न्यायमूर्ति ए.एम. खानविलकर ने केंद्र सरकार से पूछा कि संसद ने इस बारे में कुछ क्यों नहीं किया। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने इन मुद्दों का समाधान करने के लिए कोर्ट से थोड़ा समय मांगा।
आपको बता दें कि कोर्ट ने पहले ही चौकसे की दायर याचिका पर सिनेमा हॉल में फिल्म से पहले राष्ट्रगान बजाने और राष्ट्रगान के सम्मान में दर्शकों के खड़े होने को अनिवार्य कर दिया था।