सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि वह जुलाई में उस मामले की सुनवाई करेगा, जिसमें संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की एक अदालत ने हैदराबाद के उद्योगपति निम्मगड्डा प्रसाद को करीब 500 करोड़ रुपये चुकाने का आदेश दिया था। यह मामला इसलिए फिर से अदालत में आया, क्योंकि दोनों पक्षों के बीच समझौता कराने की कोशिश सफल नहीं हो सकी।
यह समझौता प्रक्रिया भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश यूयू ललित की निगरानी में चल रही थी। लेकिन समझौता नहीं हो पाया, इसलिए अब सुप्रीम कोर्ट खुद इस मामले की सुनवाई करेगा। रास अल खैमाह इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी (आरएकेआईए) नाम की विदेशी संस्था का कहना है कि यूएई की अदालत ने उसके पक्ष में फैसला दिया है और निम्मगड्डा प्रसाद को बड़ी रकम लौटानी चाहिए। यह रकम करीब 543 करोड़ रुपये है, जो ब्याज के साथ लगभग 643 करोड़ रुपये हो जाती है।
वानपिक परियोजना से जुड़ा मामला
यह विवाद 2008 के 'वानपिक परियोजना' से जुड़ा है। इस परियोजना में आंध्र प्रदेश में बंदरगाह और हवाई अड्डा बनाने की योजना थी, लेकिन यह परियोजना सफल नहीं हो सकी।
पैसे के गलत इस्तेमाल का आरोप
आरएकेआईए का आरोप है कि इस परियोजना के लिए दिए गए 12 करोड़ अमेरिकी डॉलर का गलत इस्तेमाल किया गया। संस्था का कहना है कि निम्मगड्डा प्रसाद और आरएकेआईए के पूर्व सीईओ खातेर मसाद ने मिलकर यह पैसा गलत तरीके से इस्तेमाल किया। प्रसाद की ओर से कोर्ट को बताया गया कि उन्होंने पहले ही 125 करोड़ रुपये सुरक्षा राशि के रूप में जमा कर दिए हैं। साथ ही तेलंगाना में 37 एकड़ जमीन के असली कागजात भी अदालत को सौंप दिए गए हैं।
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जुलाई में रोजाना सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जुलाई के दूसरे हफ्ते में इस मामले की रोजाना सुनवाई होगी। फिलहाल अदालत किसी अंतरिम आवेदन पर सुनवाई नहीं करेगी। कोर्ट ने पहले यह भी कहा था कि प्रसाद अपनी कंपनियों के रोजमर्रा के खर्च, जैसे कर्मचारियों का वेतन देने के लिए पैसा इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन कोर्ट की अनुमति के बिना कोई जमीन या दूसरी अचल संपत्ति नहीं बेच सकते।
600 करोड़ रुपये की सुरक्षा मांगी गई
प्रसाद ने कोर्ट में यह भी कहा था कि वह समझौते के जरिये मामले को सुलझाने के लिए तैयार हैं। दूसरी तरफ आरएकेआईए ने भी मध्यस्थता के लिए सहमति दी थी। लेकिन शर्त रखी थी कि मामले के दौरान प्रसाद अपनी संपत्तियों में कोई बदलाव नहीं करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने पहले प्रसाद से 600 करोड़ रुपये की सुरक्षा देने को कहा था। इसके लिए उन्होंने कुछ शेयर, संपत्तियां और 37 एकड़ जमीन अदालत के सामने सुरक्षा के तौर पर पेश की।