कार्डियक अरेस्ट के मरीजों की बचेगी जान (सांकेतिक)
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कार्डियक अरेस्ट के मरीजों तक केवल 3 से 5 मिनट के भीतर डिफाइब्रिलेटर (शॉक उपकरण) पहुंचाया जा सकेगा। यूरोपीय इमरजेंसी मेडिसिन कांग्रेस में पेश नई रिसर्च के मुताबिक, पारंपरिक एंबुलेंस की तुलना में ड्रोन से यह जीवन रक्षक उपकरण घटनास्थल पर पहुंच सकता है।
मरीज के बचने की संभावना को 7 से 10% कम
कार्डियक अरेस्ट के बाद हर एक मिनट की देरी मरीज के बचने की संभावना को 7 से 10% कम कर देती है। इस तकनीक का भारत जैसे देशों में मरीजों में व्यापक तौर पर लाभ होगा, जो हृदय संबंधी बीमारियों और कार्डियक अरेस्ट की उच्च दर वाले देशों में शामिल है।
कार्डियक अरेस्ट के तुरंत बाद डिफाइब्रिलेटर से शॉक
स्वीडन, कनाडा और अमेरिका के कुछ हिस्सों में इस तकनीक का परीक्षण शुरू हो चुका है और इसने कई मरीजों की जान भी बचाई है। विशेषज्ञों का कहना है कि कार्डियक अरेस्ट के तुरंत बाद डिफाइब्रिलेटर से शॉक देने पर जीवित रहने की संभावना 50 से 70% तक बढ़ जाती है।