पांपोर में आतंकी हमले में शहीद हुए गांव बली निवासी सतीश चंद को बचपन से ही फौज में जाने का जुनून था। यही कारण था कि वह सीआरपीएफ में भर्ती हुए। उसकी शहादत की सूचना पर परिजनों का बुरा हाल है। वहीं पूरा गांव गम और शोक के माहौल में डूब गया है।
सतीश का जन्म किसान परिवार में गांव बली निवासी सतपाल सिंह के यहां हुआ था। सतपाल सिंह के दो पुत्र हैं। बड़ा पुत्र अशोक रुड़की में प्राइवेट फैक्ट्री में सर्विस करता है। जबकि छोटा सतीश चंद सीआरपीएफ में था।
परिजनों ने बताया कि शुरू से ही सतीश में देशभक्ति का जज्बा था। पिता सतपाल सिंह ने बताया कि शनिवार को वह परिवार के लोगों के साथ बैठे हुए थे। रात 8 बजे फोन की घंटी बजी। फोन रिसीव करते ही दूसरी ओर से बताया गया कि डिप्टी कमाडेंट जितेंद्र सिंह बोल रहे हैं।
उन्होंने पूछा क्या आप टी वी देख रहे हैं। उन्होंने जवाब दिया नहीं। इसके बाद उन्होंने कहा कि उनका बेटा सतीश चंद शहीद हो गया है। यह सुन परिवार में कोहराम मच गया। सतीश की मां बाला देवी ने गश खाकर गिर पड़ीं।
बेटियों की परवरिश को भेजा था मेरठ
सतीश की दो बेटियां हैं। 6 वर्ष की रिशिका और 4 वर्ष की अनु। सतीश बेटियों की बेहतर परवरिश एवं शिक्षा को लेकर बेहद गंभीर थे। इसी के चलते उनकी पत्नी सावित्री मेरठ स्थित मोदीपुरम की अक्षरधाम कॉलोनी में मकान किराए पर लेकर रहती हैं, ताकि बच्चों को अच्छी शिक्षा मिल सके। पति के शहीद होने की सूचना पर सावित्री अपनी बेटियों के साथ गांव के लिए रवाना हो गई।
दो माह पूर्व आए थे गांव में
सतीश चंद 14 अप्रैल को अपने चचेरे भाई रोहित की शादी में गांव आए थे। पूरे उत्साह और खुशी के साथ वह शादी में शामिल हुए। लोगों का कहना है कि उनको नहीं पता था इसके बाद वे इस हमेशा खुश और मुस्कराते रहने वाले सतीश से नहीं मिल पाएंगे।
मैं फायर ट्रेनिंग पर जा रहा हूं
पिता सतपाल सिंह ने बताया कि आज उनकी सतीश से बात नहीं हुई। अममून रोज ही फोन पर बात होती थी पर शनिवार को बात नहीं हो पाई। लेकिन सुबह 11 बजे सतीश ने पत्नी सावित्री को कॉल की थी। बातचीत हुई तो उसने बताया था कि वह जल्द ही फायर ट्रेनिंग पर जा रहा है। वहां पहुंचकर बात करेगा।