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Saryu Nahar Rashtriya Pariyojana : क्या है सरयू नहर परियोजना, कैसे 43 साल बाद बदलेगी पूर्वांचल के 29 लाख किसानों की जिंदगी

प्रतिभा ज्योति
Updated Sat, 11 Dec 2021 04:33 PM IST

सार

सीएम योगी आदित्यनाथ का कहना है कि 9,802 करोड़ रुपये की सिंचाई प्रणाली से किसानों की आय बढ़ेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को श्रावस्ती और बहराइच जिलों में परियोजना का निरीक्षण करने के बाद कहा कि यह प्रधानमंत्री की ओर से पूर्वी यूपी के किसानों के लिए एक बड़ा उपहार है।
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सरयू नहर परियोजना का पीएम मोदी ने किया लोकार्पण - फोटो : social Media

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को यूपी के बलरामपुर में आयोजित कार्यक्रम में सरयू नहर परियोजना का लोकार्पण कर राष्ट्र को समर्पित किया। सरयू नहर परियोजना का सपना आखिरकार 43 साल बाद साकार हो रहा है। करीब 808 किमी लंबी इस नहर योजना से गोंडा, बलरामपुर, बहराइच, श्रावस्ती समेत नौ जिलों के किसानों को लाभ होगा। इससे लाखों किसानों को फायदा होगा। यह परियोजना पांच नदियों घाघरा, सरयू, राप्ती, बाणगंगा और रोहिणी को मिलाकर बनाया गया है। इस परियोजना का मुख्य भाग गोंडा है। जिले में बहराइच के रास्ते गोंडा से आई दो मुख्य नहरों से 45 नहरें निकाली जा चुकी हैं।

किसानों को किस तरह की मदद मिलेगी
इस परियोजना से क्षेत्र के नौ जिलों में लगभग 29 लाख किसानों को 14.5 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई करने में मदद मिलेगी। 6,623 किलोमीटर की नहर प्रणाली जो 318 किलोमीटर की मुख्य नहर से जुड़ी है। यह बहराइच से गोरखपुर तक नौ जिलों में फैली हुई है और घाघरा, सरयू, राप्ती और रोहिणी जैसी नदियों को जोड़ती है। इस परियोजना से बस्ती में 4.20 लाख हेक्टेयर और गोंडा में 3.96 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का दावा है कि यह परियोजना क्षेत्र के किसानों के जीवन में एक बड़ा बदलाव लाएगी क्योंकि इससे उनकी आय में वृद्धि होगी और रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

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सरयू नहर परियोजना का पीएम मोदी ने किया लोकार्पण - फोटो : social Media
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को यूपी के बलरामपुर में आयोजित कार्यक्रम में सरयू नहर परियोजना का लोकार्पण कर राष्ट्र को समर्पित किया। सरयू नहर परियोजना का सपना आखिरकार 43 साल बाद साकार हो रहा है। करीब 808 किमी लंबी इस नहर योजना से गोंडा, बलरामपुर, बहराइच, श्रावस्ती समेत नौ जिलों के किसानों को लाभ होगा। इससे लाखों किसानों को फायदा होगा। यह परियोजना पांच नदियों घाघरा, सरयू, राप्ती, बाणगंगा और रोहिणी को मिलाकर बनाया गया है। इस परियोजना का मुख्य भाग गोंडा है। जिले में बहराइच के रास्ते गोंडा से आई दो मुख्य नहरों से 45 नहरें निकाली जा चुकी हैं।

किसानों को किस तरह की मदद मिलेगी
इस परियोजना से क्षेत्र के नौ जिलों में लगभग 29 लाख किसानों को 14.5 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई करने में मदद मिलेगी। 6,623 किलोमीटर की नहर प्रणाली जो 318 किलोमीटर की मुख्य नहर से जुड़ी है। यह बहराइच से गोरखपुर तक नौ जिलों में फैली हुई है और घाघरा, सरयू, राप्ती और रोहिणी जैसी नदियों को जोड़ती है। इस परियोजना से बस्ती में 4.20 लाख हेक्टेयर और गोंडा में 3.96 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का दावा है कि यह परियोजना क्षेत्र के किसानों के जीवन में एक बड़ा बदलाव लाएगी क्योंकि इससे उनकी आय में वृद्धि होगी और रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

सरयू नहर परियोजना का पीएम मोदी ने किया लोकार्पण - फोटो : social Media
सिंचाई के लिए पानी की कमी नहीं होगी
बताया जा रहा है कि अब कम से कम तराई और पूर्वांचल के नौ जिलों के किसानों को सिंचाई के लिए पानी का अभाव नहीं होगा। जिस नदी में पानी कम होगा उसमें बड़ी नदी से पानी बैराज के जरिए पहुंचाया जाएगा और खेतों को पानी मिलेगा। वहीं खरीफ और रबी दोनों फसलों के समय किसानों को पानी मिल सकेगा।  इस परियोजना को पूर्वांचल के कुछ क्षेत्रों में मुख्य और सहायक नहरों को घाघरा, सरयू, राप्ती नदी पर बने बैराजों से जोड़कर बाढ़ की समस्या का स्थायी समाधान निकालने की कोशिश कहा जा सकता है।



परियोजना कब शुरू हुई
राज्य सरकार के अनुसार, परियोजना को 1974 में अंतिम रूप दिया गया था, तब इसे लेफ्ट बैंक घाघरा कैनाल नाम दिया गया था। लेकिन इस पर 1978 में काम शुरू हुआ। 1982 में इसमें सात और जिले जोड़े गए। तब भारत सरकार ने इसका नाम बदलकर सरयू परियोजना रख दिया। तय हुआ कि इसमें घाघरा के साथ राप्ती, रोहिन को भी नहर प्रणाली से जोड़ा जाएगा। 1978 और 2017 के बीच, परियोजना का केवल 52 प्रतिशत पूरा हुआ। 

परियोजना में देरी की वजह क्या 
इसकी मुख्य वजह जमीन अधिग्रहण में देरी, धन की कमी, अंतरविभागीय समन्वय और पर्याप्त निगरानी को माना गया।  यूपी सीएम ने गुरुवार को दावा किया कि बाकी बचा उनकी सरकार ने समय पर पूरा किया है। 1978 से 2017 तक इस परियोजना पर 5189 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जबकि 2017 से लेकर अब तक 4613 करोड़ खर्च किए जा चुके हैं।

PM Modi CM Yogi - फोटो : अमर उजाला।
डबल इंजन सरकार के उदाहण के तौर पर दिखा रही भाजपा सरकार
राज्य और केंद्र में भाजपा की 'डबल इंजन सरकार' ने यूपी के किसानों के लिए क्या किया है, इसी बात को योगी सरकार इस परियोजना के जरिए बताने की कोशिश की है। डबल इंजन वाली सरकार जिक्र पीएम ने भी शनिवार को अपने भाषण में भी किया। योगी आदित्यनाथ ने अक्टूबर 2018 में 500 करोड़ रुपये की परियोजना की समीक्षा की थी और अधिकारियों को हर हफ्ते काम की प्रगति की समीक्षा करने का निर्देश दिया था।

इस तरह मिलेगा पानी
परियोजना के बारे में विस्तार से बताते हुए सरकार की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि बहराइच में घाघरा नदी पर बने गिरजापुरी बैराज के बाएं किनारे से 360 क्यूसेक की क्षमता वाली 17.035 किलोमीटर लंबी सरयू सहायक नहर निकाली गई है, जो सरयू नदी पर बने सरयू बैराज के दाहिने किनारे पर पानी लाएगा। इसी प्रकार सरयू बैराज के बाएं किनारे से 360 क्यूसेक क्षमता वाली 63.15 किलोमीटर लंबी सरयू नहर निकाली गई है।

सरयू नहर परियोजना का पीएम मोदी ने किया लोकार्पण - फोटो : social Media
ऐसे मिलेगा फायदा
सरकारी बयान के मुताबिक नहर की इमामगंज शाखा को सरयू मुख्य नहर से लगभग 21.4 किमी दूर ले जाया गया है और 21.4 किमी लंबी सहायक राप्ती नहर का निर्माण सरयू मुख्य नहर के बाएं किनारे से 34.70 किमी दूर किया गया है। यह राप्ती बैराज के ऊपर की ओर राप्ती नदी को पानी उपलब्ध कराएगा और 125.682 किमी लंबी राप्ती मुख्य नहर के लिए उपयोग किया जाएगा।

श्रावस्ती में लक्ष्मणपुर कोठी के पास बन रहे राप्ती बैराज के बाएं किनारे पर राप्ती मुख्य नहर का निर्माण कार्य प्रगति पर है। इसकी कुल लंबाई 125.682 किमी है। इस नहर के दोनों ओर आठ मीटर चौड़ी सर्विस रोड बनाई जाएगी,  जो श्रावस्ती, बलरामपुर और सिद्धार्थनगर तक जाएगी।

 
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