उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत न्यायाधीश एन संतोष हेगड़े ने कहा है कि शीर्ष न्यायालय हर मुकदमे के लिए नहीं बल्कि सिर्फ संविधान की व्याख्या जैसे विशेषीकृत विषयों के लिए आखिरी अदालत होनी चाहिए।
न्यायमूर्ति हेगड़े ने पीटीआई-भाषा को बताया, ‘उच्चतम न्यायालय हर मुकदमे के लिए आखिरी अदालत नहीं होनी चाहिए; अमेरिकी उच्चतम न्यायालय की तरह इसे संविधान की व्याख्या जैसे कुछ विशेषीकृत विषयों के लिए ही आखिरी अदालत होना चाहिए।’
उन्होंने ने कहा, ‘उच्च न्यायालय और अन्य न्यायालयों को इससे (अन्य विषयों से) निपटने दें। मामला वहीं (उच्च न्यायालय एवं अन्य अदालतों में; उच्चतम न्यायालय तक न ले जाएं) रुक जाने दें।’ कर्नाटक के लोकायुक्त रह चुके न्यायमूर्ति हेगड़े ने कहा कि उच्च न्यायालयों को थोड़ा ज्यादा सतर्क रहना चाहिए और मुकदमों की संख्या में कमी लानी चाहिए।
हेगड़े ने कहा, ‘सारे मामलों को नियमित (रूटीन) तौर पर नहीं लेना चाहिए।’ उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय को ‘संविधान अदालत’ या ‘ऐसी ही कोई चीज’ बना देने से उसे मदद मिलेगा। उन्होंने आज हर मामला पहली अदालत से शुरू होकर शीर्ष अदालत तक जाता है।