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विहिप की बैठक में भाजपा से नाराज दिखे संत, कहा- हिंदुत्व के मुद्दों से दूर रही सरकार

Sat, 06 Oct 2018 02:38 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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विश्व हिंदू परिषद (विहिप) से जुड़े संतों की उच्चाधिकार समिति की बैठक में शुक्रवार को भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के खिलाफ गहरी नाराजगी दिखाई दी। कई संतों का कहना था कि राम मंदिर निर्माण के लिए सरकार ने कानून बनाने तक की पहल तक नहीं की।

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सूत्रों के अनुसार, संतों का कहना था कि सर्वोच्च न्यायालय से भी मंदिर विवाद में जल्द निर्णय की उम्मीद खत्म हो गई है, ऐसे में संतों को इस मामले में सरकार के समक्ष अपना रुख साफ कर देना चाहिए। कई संतों ने कहा कि केंद्र सरकार के साढ़े चार साल के कार्यकाल में हिंदुत्व से जुड़े सभी अहम मुद्दों मसलन राम मंदिर, अनुच्छेद 370, समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में विमर्श तक नहीं किया गया।

संतों की बारी कि याद दिलाएं सरकार को इसके वादे : स्वामी चिन्मयानंद

समिति के सदस्य स्वामी चिन्मयानंद ने कहा कि राम मंदिर इस सरकार के विमर्श में ही नहीं है, जबकि भाजपा ने ही वर्ष 1989 में मंदिर के पक्ष में प्रस्ताव पारित किया था। अब संतों की बारी है कि वह भाजपा को उसके वादों की याद दिलाए। उन्होंने सवाल उठाया कि जब एससी-एसटी एक्ट और तीन तलाक मामले में अध्यादेश लाया जा सकता है तो राम मंदिर निर्माण के लिए क्यों नहीं? 

समिति के दूसरे सदस्य रामविलास वेदांती ने कहा कि सरकार मंदिर निर्माण के लिए जल्द अध्यादेश लाए और संसद में उसे कानून बनाए। अगर जल्द ऐसा नहीं किया तो हम मंदिर निर्माण के लिए कार सेवा शुरू करने की घोषणा करेंगे। उच्चाधिकार समिति के सबसे युवा सदस्य और अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि रामजन्म भूमि का फैसला जल्द न होने देने के लिए हिंदू विरोधी शक्तियां साजिश कर रही हैं। अयोध्या में भव्य मंदिर निर्माण के लिए अब संत समाज ज्यादा इंतजार नहीं कर सकता।
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हर चुनाव में मुद्दा बनाने की कोशिश

विहिप की लोकसभा चुनाव से पूर्व इसे चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश नई नहीं है। वर्ष 1992 में अयोध्या में विवादित ढांचा गिरने के बाद हर आम चुनाव से ठीक पहले राम मंदिर को मुद्दा बनाने की कोशिश होती रही है। हालांकि वर्ष 1996 के आमचुनाव के बाद राम मंदिर निर्माण एक बार भी चुनाव का केंद्रीय मुद्दा नहीं बन पाया है।
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