देश में विलुप्त हो रही कठपुतली, जनजाति, नट सहित सांस्कृतिक विरासत के रूप में मान्यता प्राप्त अन्य लोक कलाओं और परंपराओं को बचाने के लिए संस्कृति मंत्रालय के बैनर तले संगीत नाटक अकादमी ने वेब अभियान ‘सांझी’ का दूसरा चरण लांच किया है। इसके माध्यम से कलाकार अपनी कला को विडियो, ऑडियो या चित्रकला के प्रारूप में 31 जनवरी तक www.sangeetnatakkala.gov.in पर अपलोड कर सकते हैं।
सांझी अभियान के दूसरे चरण में पारंपरिक लोक कलाओं, प्रथागत सामाजिक और अनुष्ठानिक कलाओं के साथ पाक कला, नृत्य कला और चित्रकला तक शामिल है। नवंबर 2018 में दिवाली के दौरान शुरू हुए अभियान के पहले चरण में करीब 500 कलाकारों ने रजिस्ट्रेशन कराया था। इसमें दिवाली त्योहार से संबंधित विलुप्त संगीत, नृत्य और लेखन के साथ कविता आदि के ऑडियो और वीडियो अपलोड किए गए थे।
साथ ही दृश्य कला जैसे पेंटिंग, क्राफ्ट वर्क, टेराकोटा के काम, चावल के आटे और प्राकृतिक रंगों से बनी रंगोली आदि की प्रविष्टियां आईं थीं। इन्हें एक स्क्रीनिंग कमेटी ने चुनकर श्रेष्ठ और सर्वश्रेष्ठ की श्रेणी में सूचीबद्ध किया था।