'स्वास्थ्य मंत्रालय और एम्स जीरो टॉलरेंस ऑन ओनेस्टी पर काम कर रही'
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उत्तराखंड कैडर के भारतीय वन सेवा के अधिकारी और एम्स के पूर्व चीफ विजिलेंस ऑफिसर (सीवीओ) संजीव चतुर्वेदी को भ्रष्टाचार के खिलाफ भाषण देने के लिए थाईलैंड जाना था लेकिन स्वास्थ्य मंत्रालय और एम्स ने कागजों में ऐसा उलझाया कि वह चाह कर भी वहां नहीं पहुंच सके।
एम्स ने अर्न्ड लिव देने में देर कर दी तो केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने देश से बाहर जाने के संबंध में कोई फैसला ही नहीं लिया। इसके बाद संजीव ने केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव को पत्र लिख कर अपना दर्द बयां किया और कहा कि मुझे परेशान करने के एजेंडे पर मंत्रालय और एम्स काम कर रहा है।
संजीव ने केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव बी.पी.शर्मा को पत्र लिख कर कहा है प्रधानमंत्री कहते हैं जीरो टॉलरेंस ऑन करप्शन, वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य मंत्रालय और एम्स जीरो टॉलरेंस ऑन ओनेस्टी पर काम कर रही है। मुझे लगातार परेशान किया जा रहा है और मेरी राह में गलत तरीके से बाधा उत्पन्न की जा रही है। पत्र में लिखा गया है कि कैसे उनकी दिल्ली सरकार में प्रतिनियुक्ति को लटका कर रखा गया है और कैसे रैमन मैग्सेसे अवार्ड की राशि लेने में मंत्रालय और एम्स ने आनाकानी की।
संजीव ने कहा है कि एम्स ने तीन दिन की अर्न्ड लीव (ईएल) देने में 45 दिनों का समय लगाया । मामले को लटकाने के लिए एक दर्जन से अधिक पत्र-व्यहार किए गए, जिसकी आवश्यकता नहीं थी। उन्होंने पत्र में लिखा है कि उनके साथ ऐसा व्यवहार इसलिए किया गया क्योंकि उन्होंने बतौर सीवीओ जो कार्य किया था, उससे प्रशासन नाराज है।
दरअसल, थाईलैंड के कॉलेज और पॉलिटिक्स एंड गवर्नेंस महासराखम यूनिवर्सिटी की ओर से संजीव चतुर्वेदी को भ्रष्टाचार के खिलाफ के भाषण देने के लिए बुलाया गया था। भ्रष्टाचार के खिलाफ काम करने पर ही संजीव को रैमन मैग्सेसे अवार्ड दिया गया था। 31 मई को आयोजित होने वाले कार्यक्रम में यूनिवर्सिटी की ओर से सभी रैमन मैग्सेसे पुरस्कार विजेताओं को आमंत्रित किया गया था।