महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) के अभ्यर्थियों के आंदोलन को लेकर शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर निशाना साधा है। रविवार को पुणे में प्रदर्शन कर रहे छात्रों से मिलने पहुंचे राउत ने आयोग के अध्यक्ष को हटाने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर छात्रों की मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन पूरे महाराष्ट्र में फैल सकता है। राउत ने कहा कि प्रदर्शन में लगाए जा रहे नारे मुख्यमंत्री तक पहुंचने चाहिए, लेकिन उन्हें लगता है कि फडणवीस जानबूझकर छात्रों की आवाज अनसुनी कर रहे हैं।
एमपीएससी अभ्यर्थियों की क्या हैं मांगें?
एमपीएससी अभ्यर्थी पुणे में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार के साथ प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी प्रमुख मांगों में आयोग के अध्यक्ष को हटाना और परीक्षा प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता व निष्पक्षता सुनिश्चित करना शामिल है। राउत ने कहा कि महाराष्ट्र के अलग-अलग हिस्सों से हजारों छात्र अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतर रहे हैं। वे अपनी मांगें पूरी कराने के लिए गिरफ्तारी का सामना करने को भी तैयार हैं। प्रदर्शन को महाराष्ट्र का जंतर-मंतर बताते हुए उन्होंने कहा कि यहां आंदोलन तब तक जारी रहता है, जब तक मांगें पूरी नहीं हो जातीं।
फडणवीस के दावे पर राउत ने क्यों उठाए सवाल?
राउत ने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का दावा है कि सरकार ने छात्रों की सभी मांगें मान ली हैं। उन्होंने सवाल किया कि अगर ऐसा है तो छात्र अब भी प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं? राउत ने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों के प्रतिनिधियों से बातचीत करने के बजाय आंदोलन में फूट डालने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार की नीयत साफ होती तो वह छात्रों और रोहित पवार से बातचीत करके उनकी मांगों को समझती। राउत ने एमपीएससी में ऊपर से नीचे तक बदलाव की मांग करते हुए सवाल किया कि जो सरकार निष्पक्ष तरीके से चुनाव नहीं करा सकती, वह निष्पक्ष परीक्षाएं कैसे कराएगी?
आंदोलन बढ़ा तो मुख्यमंत्री की मुश्किलें बढ़ेंगी: राउत
संजय राउत ने आरोप लगाया कि प्रशासन में एक खास विचारधारा से जुड़े लोगों को नियुक्त करने की कोशिश हो रही है। उन्होंने प्रदर्शन कर रहे युवाओं से भरोसा बनाए रखने की अपील की और कहा कि महत्वपूर्ण पदों पर बैठे उन लोगों को आखिरकार जाना पड़ेगा, जो छात्रों की मांगों का विरोध कर रहे हैं। राउत ने चेतावनी दी कि अगर एमपीएससी अभ्यर्थियों का आंदोलन पूरे महाराष्ट्र में फैल गया तो मुख्यमंत्री के लिए दक्षिण मुंबई स्थित अपने सरकारी आवास वर्षा से निकलना भी मुश्किल हो सकता है। उन्होंने कहा कि युवाओं में घटनाओं की दिशा बदलने और बदलाव लाने की ताकत है। अगर सरकार उनकी बात सुनने को तैयार नहीं है तो वह किसकी बात सुनेगी?
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ज्ञानेश कुमार पर भी साधा निशाना, मुंबई के प्रदर्शन का किया जिक्र
राज्यसभा सांसद राउत ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उन्हें लगता है कि कुमार को भी आखिरकार पद छोड़ना पड़ेगा। उनकी यह टिप्पणी मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग को लेकर जारी प्रदर्शनों के संदर्भ में थी। राउत ने आरोप लगाया कि एक 'सफेदपोश माफिया' प्रशासन पर नियंत्रण करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोग प्रशासन में अपने पसंद के लोगों को चाहते हैं, लेकिन अब उनके प्रभाव को कम करने की कोशिश शुरू हो गई है।
राउत ने दावा किया कि रविवार सुबह मुंबई में शिवसेना (यूबीटी) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के नेतृत्व में निकाले गए मार्च में लाखों लोग शामिल हुए। उन्होंने कहा कि भाजपा ने इन प्रदर्शनों को मामूली बताकर खारिज किया, लेकिन उनके मुताबिक प्रदर्शन से भाजपा घबराई हुई है। राउत ने बताया कि शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे की तबीयत खराब होने के कारण वह प्रदर्शनकारी छात्रों से मिलने नहीं आ सके। हालांकि, उन्होंने कहा कि आदित्य ठाकरे छात्रों का समर्थन करने जरूर आएंगे। इस बीच, राज्य के मंत्री नीतेश राणे ने पुणे के नवी पेठ इलाके में आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों के दूसरे समूह से मुलाकात की।
एमपीएससी पेपर लीक की जांच हो, अध्यक्ष इस्तीफा दें: अनिल देशमुख
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के नेता अनिल देशमुख ने कहा कि पुणे में एमपीएससी अभ्यर्थी बड़ी संख्या में प्रदर्शन और भूख हड़ताल कर रहे हैं। रोहित पवार समेत कई लोग भूख हड़ताल पर बैठे हैं और हजारों युवा उनका समर्थन कर रहे हैं। देशमुख के मुताबिक, उन्होंने प्रदर्शन स्थल का दौरा किया, जहां करीब 10 से 12 हजार युवा मौजूद थे। उन्होंने कहा कि बार-बार पेपर लीक होने से छात्रों को भारी नुकसान होता है। इसकी जांच होनी चाहिए, एमपीएससी अध्यक्ष से इस्तीफा मांगा जाना चाहिए और उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।