महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने मराठी भाषा आंदोलन को बंद करने का फैसला किया है। यू-टर्न लेने पर शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने ठाकरे की आलोचना की। साथ ही कहा कि उन्होंने आंदोलन बंद कर अपनी राजनीतिक परंपरा का पालन किया है।
शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने रविवार को बैंकों और अन्य जगहों पर मराठी के उपयोग को लागू करने के लिए आंदोलन को रोकने के महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे के फैसले की आलोचना की। उन्होंने कहा कि निचले स्तर के कर्मचारियों को निशाना बनाना व्यर्थ है। उन्होंने कहा कि मराठी भाषा आंदोलन को रोकने का फैसला करके ठाकरे ने अपनी राजनीतिक परंपरा का पालन किया है। मेरी शुभकामनाएं उनके साथ हैं।
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30 मार्च को गुड़ी पड़वा पर अपनी रैली में, मनसे प्रमुख ठाकरे ने आधिकारिक कामों के लिए मराठी को अनिवार्य बनाने के अपने रुख को दोहराया था। इस दौरान उन्होंने चेतावनी दी थी कि जो लोग जानबूझकर भाषा नहीं बोलेंगे, उन्हें 'थप्पड़' मारा जाएगा। बाद में मनसे कार्यकर्ताओं ने कुछ बैंकों और प्रतिष्ठानों में हंगामा किया, जिसके चलते राज ठाकरे ने शनिवार को कार्यकर्ताओं को आंदोलन बंद करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि आंदोलन ने स्थानीय भाषा के उपयोग को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक के मानदंडों का पालन न करने के परिणाम दिखाए हैं।
राउत ने बैंक कर्मियों के साथ मारपीट की आलोचना की
संजय राउत ने मनसे द्वारा यू-टर्न लेने के बारे में संवाददाताओं से बात की। उन्होंने कहा, 'राज ठाकरे ने अपनी राजनीतिक परंपरा का पालन किया है। मेरी शुभकामनाएं उनके साथ हैं।' राउत ने मनसे कार्यकर्ताओं द्वारा कुछ बैंक कर्मियों के साथ की गई मारपीट की भी आलोचना की। उन्होंने पूछा, 'चपरासी या चौकीदार को पीटने से क्या होगा? क्या वे नीतियां तय करते हैं।'
बालासाहेब पर बनी फिल्म में दिखाया कि किसे पीटना है
राउत ने कहा कि मनसे कार्यकर्ताओं ने बृहस्पतिवार को एक निजी बैंक में धावा बोला था। इस दौरान उन्होंने बैंक प्रबंधक से आश्वासन लिया था कि वे अपनी शाखा में मराठी भाषा के बोर्ड लगाएंगे और अंग्रेजी बोर्ड हटाएंगे। उन्होंने कहा कि हमने शिवसेना सुप्रीमो बालासाहेब ठाकरे पर एक फिल्म बनाई, जिसमें दिखाया गया कि किसे पीटना है। हमने चपरासी को नहीं बल्कि एयर इंडिया के चेयरमैन को पीटा। इसका प्रभाव यह हुआ कि एयर इंडिया तथा अन्य राष्ट्रीय संस्थानों में मराठी युवाओं की भर्ती का रास्ता साफ हो गया।