घर की सबसे छोटी संतान संजना के अलावा उसकी तीनों बहनों और चारों भाइयों की शादी हो चुकी है। मात्र 14 साल की संजना के लिए भी पिता एक अच्छा रिश्ता मिल गया था और उसके भी हाथ पीले होने को थे कि संजना अड़ गई।
मां के जरिए जब बात पिता तक पहुंची तो उन्होंने प्रचलित तर्क का सहारा लिया कि शादी कर देते हैं लेकिन गौना बाद में करेंगे। संजना इस भुलावे में उलझने से साफ इनकार कर गई और उसने अपनी पढ़ाई जारी रखने की मंशा पुरजोर तरीके से दोबारा मां-पिता के सामने रखी। आखिरकार पिता मान ही गये। संजना की पढ़ाई और खुशियों का सिलसिला 10वीं क्लास की रौनक के साथ जारी है।
स्मार्ट बेटियां अभियान से जुड़ी इंटरनेट साथी पिंकी देवी ने यह वीडियो कथा बनाकर अमर उजाला को भेजी है। अमर उजाला फाउंडेशन, यूनिसेफ, फ्रेंड और जे.एम.सी. के साझा अभियान स्मार्ट बेटियां के तहत श्रावस्ती और बलरामपुर जिले की 150 किशोरियों-लड़कियों को अपने मोबाइल फोन से बाल विवाह के खिलाफ काम करने वालों की ऐसी ही सच्ची और प्रेरक कहानियां बनाने का संक्षिप्त प्रशिक्षण दिया गया है। इन स्मार्ट बेटियों की भेजी कहानियों को ही हम यहां आपके सामने पेश कर रहे हैं।