मुंबई पुलिस (Mumbai Police) ने रविवार को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (Nationalist Congress Party) के नेता नवाब मलिक (Nawab Malik) के खिलाफ नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के पूर्व क्षेत्रीय निदेशक समीर वानखेड़े (Sameer Wankhede) की शिकायत पर मानहानि का मामला (Defamation Case) दर्ज किया है। महाराष्ट्र सामाजिक न्याय विभाग की मुंबई जिला जाति प्रमाण पत्र सत्यापन समिति से क्लीन चिट मिलने के बाद वानखेड़े ने शिकायत दर्ज कराई है। समीर वानखेड़े ने यह मामला एससी-एसटी एक्ट (SC-ST Act) के तहत दर्ज कराया है। मलिक ने मंत्री रहते हुए वानखेड़े पर एससी-एसटी के फर्जी दस्तावेज बनाकर नौकरी हासिल करने का आरोप लगाया था।
मुंबई की गोरेगांव पुलिस (Goregaon police) ने भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) के साथ-साथ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 500 (मानहानि के लिए सजा) और 501 (मुद्रण या उत्कीर्णन मामला जो मानहानिकारक के रूप में जाना जाता है) के तहत मामला दर्ज किया है। गोरेगांव डिवीजन के एसीपी मामले की जांच करेंगे। मुंबई जिला जाति प्रमाण पत्र सत्यापन समिति ने 13 अगस्त को वानखेड़े के परिवार के खिलाफ दर्ज शिकायतों को खारिज कर दिया था और पुष्टि की थी कि वह अनुसूचित जाति से संबंधित हैं।
मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में जेल में बंद हैं नवाब मलिक
मलिक फिलहाल प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा जांच किए जा रहे विभिन्न मनी लॉन्ड्रिंग मामलों के सिलसिले में जेल में बंद हैं। ईडी ने पूर्व अल्पसंख्यक विकास मंत्री मलिक को 23 फरवरी, 2022 को गैंगस्टर दाऊद इब्राहिम के सहयोगियों से कथित रूप से जुड़े एक संपत्ति के सौदे में गिरफ्तार किया था। दरअसल, आर्यन खान की गिरफ्तारी के बाद मलिक ने मंत्री रहते हुए वानखेड़े पर आरक्षित वर्ग के फर्जी दस्तावेज बनाकर नौकरी हासिल करने का आरोप लगाया था और वानखेड़े को मुस्लिम बताया था। अब हाल ही इस मामले पर मुंबई जिला जाति प्रमाण पत्र सत्यापन समिति ने वानखेड़े को क्लीन चिट दे दी है। ऐसे में नवाब मलिक जो दाऊद कंपनी की अवैध तरीके से संपत्ति खरीदने और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में पहले से ही जेल में हैं। अब इस नई एफआईआर से उनकी मुसीबत बढ़ेंगी।
समीर वानखेड़े को एससी-एसटी कमीशन ने दी 'क्लीन चिट'
एनसीबी के पूर्व मुंबई जोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े को एससी-एसटी कमीशन ने 'क्लीन चिट' दे दी है। समीर पर यह आरोप था कि वह सरकारी नौकरी पाने के लिए जाली जाति प्रमाण पत्र जमा किए थे। आरोप को लेकर जांच की गई थी। मामले पर एक अधिकारी ने बताया कि यह आदेश महाराष्ट्र सरकार के सामाजिक न्याय विभाग ने शुक्रवार को जारी किया। आदेश में कहा गया है कि भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) के अधिकारी वानखेड़े जन्म से मुस्लिम नहीं थे। यह साबित हो गया है कि वह महार जाति से हैं, जो अनुसूचित जाति (एससी) की श्रेणी में आती है।
नवाब मलिक ने लगाया था यह आरोप
वानखेड़े की जाति का मुद्दा महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता नवाब मलिक ने उठाया था। वानखेड़े के खिलाफ राजनीतिक नेता मनोज संसारे, अशोक कांबले और संजय कांबले समेत शिकायतकर्ताओं ने आवेदन दायर किए थे। मुंबई जिला जाति प्रमाण पत्र सत्यापन समिति ने शिकायतों की जांच की और शुक्रवार को उसी पर एक आदेश पारित किया। आदेश में कहा गया है कि यह साबित नहीं हुआ कि वानखेड़े और उनके पिता ज्ञानदेव वानखेड़े ने हिंदू धर्म को त्याग कर स्वयं को विधिवत इस्लाम में परिवर्तित किया था। आदेश में ये भी कहा गया है कि इससे यह साबित होता है कि वानखेड़े और उनके ससुर महार-37 अनुसूचित जाति के हैं। आदेश में कहा गया है कि नवाब मलिक और अन्य द्वारा वानखेड़े के जातिगत दावे और जाति प्रमाण पत्र के धर्म के संबंध में दायर शिकायतों की पुष्टि नहीं की जाती है, जिसके बाद शिकायत में तथ्यों की कमी के कारण शिकायतों को खारिज कर दिया गया।