अमर उजाला ने एक अगस्त को राजनीतिक कॉरियर बचाने के लिए विपक्ष के सांसदों के कमल पर सवार की खबर प्रकाशित की थी। खबर सच साबित हुई। समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद सुरेन्द्र नागर ने पार्टी और संसद की सदस्यता दोनों से त्याग पत्र दे दिया है। सुरेन्द्र नागर भी भाजपाई होंगे।
सुरेन्द्र नागर के इस्तीफा को राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू ने मंजूर कर लिया है। नागर अब तक तीन राजनीतिक दल बदल चुके हैं। पहले वह राष्ट्रीय लोकदल के सदस्य थे। राष्ट्रीय लोकदल के कोटे से समाजवादी पार्टी की मुलायम सिंह सरकार ने नागर को एमएलसी बनने का अवसर दिया था। बाद में सुरेन्द्र नागर ने बसपा का दामन थाम लिया था। 2009 में वह बसपा के टिकट पर चुनाव लड़े और गौतम बुद्ध नगर से सांसद चुने गए।
इसके बाद नागर ने बसपा भी छोड़ दी और सपा में चले गए। उन्हें समाजवादी पार्टी में शामिल कराने में, पहली बार एमएलसी बनाने में नरेश अग्रवाल ने काफी सहायता की थी। लोकसभा चुनाव 2019 के नतीजों के बाद सुरेन्द्र नागर को एक बार फिर समाजवादी पार्टी की नाव डगमगाती नजर आ रही है। लिहाजा उन्होंने पार्टी का साथ छोड़कर अब भाजपा में शामिल होने का निर्णय ले लिया है।
नीरज शेखर के दोस्त हैं नागर
सुरेन्द्र नागर की समाजवादी पार्टी छोड़कर भाजपा में जाने वाले नीरज शेखर से गहरी छनती है। नीरज शेखर भी समाजवादी पार्टी के कोटे राज्यसभा सदस्य थे। उन्होंने भी हाल में समाजवादी पार्टी छोड़ी है। नीरज शेखर के बाद कांग्रेस पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भाजपा का दामन थाम लिया। अब सुरेन्द्र नागर ने भी इसी रास्ते को अपनाया है।
हाल के दिनों में सपा के यह दूसरे नेता हैं जिन्होंने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया है। इससे पहले 16 जुलाई को सपा के राज्यसभा सदस्य नीरज शेखर ने भी उच्च सदन की सदस्यता से इस्तीफा दिया था। बाद में वह भाजपा में शामिल हो गए थे। राज्यसभा में उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर रहे नागर का कार्यकाल चार जुलाई 2022 तक था।