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कौन था सैयद सालार मसूद गाजी: जिसकी याद में रखे जाने वाले संभल मेले पर उठा विवाद, क्या है वजह? जानें सबकुछ

न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Sun, 23 Mar 2025 07:55 AM IST

सार

सैयद सालार मसूद गाजी कौन था? संभल जिले में लगने वाले मेले को लेकर क्या विवाद सामने आया है? इस मेले के आयोजन की कहानी क्या है? इस बार प्रशासन ने इस मेले की अनुमति क्यों नहीं दी है? इसके अलावा अलग-अलग पक्षों ने सालार गाजी की याद में किए जाने वाले आयोजन को लेकर क्या तर्क दिए हैं? आइये जानते हैं...
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मेले को लेकर विवाद - फोटो : AI Generated
उत्तर प्रदेश में इस वक्त सैयद सालार मसूद गाजी की याद में आयोजित होने वाले मेले को लेकर विवाद छिड़ा है। यह विवाद संभल से शुरू होकर अब बहराइच दरगाह में होने वाले मेले तक पहुंच गया है। इसे लेकर यूपी में सियासी हलचल भी तेज हो चुकी है। दरअसल, एक पक्ष ने गाजी को सूफी संत बताते हुए मेले के आयोजन को बीते वर्षों की तरह अनुमति देने की अपील की है, वहीं दूसरे पक्ष का कहना है कि मसूद गाजी एक आक्रांता था और इसलिए उसकी याद में किसी भी तरह के आयोजन की इजाजत नहीं होनी चाहिए।

ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर सैयद सालार मसूद गाजी कौन था? संभल जिले में लगने वाले मेले को लेकर क्या विवाद सामने आया है? इस मेले के आयोजन की कहानी क्या है? इस बार प्रशासन ने इस मेले की अनुमति क्यों नहीं दी है? इसके अलावा अलग-अलग पक्षों ने सालार गाजी की याद में किए जाने वाले आयोजन को लेकर क्या तर्क दिए हैं? आइये जानते हैं...


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मेले को लेकर विवाद - फोटो : AI Generated
उत्तर प्रदेश में इस वक्त सैयद सालार मसूद गाजी की याद में आयोजित होने वाले मेले को लेकर विवाद छिड़ा है। यह विवाद संभल से शुरू होकर अब बहराइच दरगाह में होने वाले मेले तक पहुंच गया है। इसे लेकर यूपी में सियासी हलचल भी तेज हो चुकी है। दरअसल, एक पक्ष ने गाजी को सूफी संत बताते हुए मेले के आयोजन को बीते वर्षों की तरह अनुमति देने की अपील की है, वहीं दूसरे पक्ष का कहना है कि मसूद गाजी एक आक्रांता था और इसलिए उसकी याद में किसी भी तरह के आयोजन की इजाजत नहीं होनी चाहिए।

ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर सैयद सालार मसूद गाजी कौन था? संभल जिले में लगने वाले मेले को लेकर क्या विवाद सामने आया है? इस मेले के आयोजन की कहानी क्या है? इस बार प्रशासन ने इस मेले की अनुमति क्यों नहीं दी है? इसके अलावा अलग-अलग पक्षों ने सालार गाजी की याद में किए जाने वाले आयोजन को लेकर क्या तर्क दिए हैं? आइये जानते हैं...

सैयद सालार मसूद गाजी कौन था?
सैयद सालार मसूद गाजी गजनी के आक्रमणकारी महमूद गजनवी का सेनापति और उसका भांजा था। कहा जाता है कि सालार गाजी उत्तर भारत के दिल्ली, मेरठ, बुलंदशहर, बदायूं और कन्नौज के राजाओं को रौंदता और प्रमुख देवस्थानों को ध्वस्त करता हुआ बाराबंकी (मौजूदा समय में उत्तर प्रदेश के मध्य) तक आ गया था। वह बहराइच पर आक्रमण कर अयोध्या पहुंचना चाहता था, पर 1034 ईसवी में कौशल के महाराजा सुहेलदेव ने उसे और उसकी एक लाख 30 हजार की सेना को भी खत्म कर दिया। बहराइच जिले में ही सैयद सालार मसूद गाजी की दरगाह है। यहां उसकी याद में जेठ मेला का आयोजन होता है। करीब एक माह तक चलने वाले मेले में जियारत करने के लिए बड़ी संख्या में जायरीन पहुंचते हैं। इसमें आम लोगों के साथ-साथ नामी लोग भी शिरकत करते रहे हैं। इसी सालार गाजी की याद में संभल में नेजा मेला आयोजित किया जाता है।

नेजा मेला क्या है?

इस मेले का आयोजन क्यों होता है?
नेजा कमेटी के अध्यक्ष शाहिद हुसैन मसूदी दावा करते हैं कि वर्ष 1015 के आसपास संभल पृथ्वीराज चौहान की राजधानी थी। कहा जाता है कि वर्ष 1030 के आसपास पृथ्वीराज चौहान के बेटे संभल के शेख पचासे मियां की बेटी से शादी करना चाहते थे। शेख पचासे मियां की बेटी शादी नहीं चाहती थीं, इसकी सूचना सैयद सालार मसूद गाजी को भेजी गई। वह अपनी सेना के साथ संभल आए और पृथ्वीराज चौहान के साथ युद्ध किया था। इस युद्ध में सैयद सालार मसूद गाजी के साथियों ने भी जान गंवाई थी। मसूद गाजी के जिन-जिन साथियों ने इस युद्ध में जान गंवाई, उनकी मजार संभल के आसपास बनाई गई। उन्हीं मजार के आसपास मेले आयोजित किए जाते हैं।

वहीं, दूसरी ओर 2024 में छपे मुरादाबाद मंडल के गजेटियर में नेजा मेले का जिक्र है। इसमें यह भी कहा गया है कि इस मेले की शुरुआत से जुड़े कोई ठोस साक्ष्य नहीं हैं। इसी में सालार गाजी और पृथ्वीराज चौहान का जिक्र करते हुए दोनों के कालखंड को भी अलग-अलग बताया गया है। 
 

इस बार मेले की अनुमति क्यों नहीं दी गई?
इस साल प्रशासन ने मेले के आयोजन की अनुमति नहीं दी है। पुलिस ने कहा कि जिस सालार मसूद गाजी की याद में यह आयोजन किया जाता है वह महमूद गजनवी का सेनापति था। इतिहास में इस बात का जिक्र है कि सालार मसूद ने लूटपाट और हत्याएं की थीं। लुटेरे और हत्यारे की याद में मेला लगाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। अगर इसके बाद भी किसी ने मेला लगाने की कोशिश की तो उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाएगा। संभल ASP श्रीश चंद्र ने कहा कि महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर लूटा था। उसका सेनापति सैयद सालार मसूद गाजी था। मेले को लेकर दूसरे समुदाय के लोगों ने आपत्ति दर्ज कराई है। कानून-व्यवस्था बिगड़ने का भी खतरा है, लिहाजा नेजा मेला नहीं लगने दिया जाएगा और न ढाल लगाई जाएगी। उन्होंने कहा कि अज्ञानता में यह मेला लगाया जाता रहा है तो अज्ञानी हो और यदि जानबूझकर यह मेला लगाया गया है तो देशद्रोही हो।  

सांसद बर्क बोले: 'सालार मसूद गाजी महान संत...', उनकी याद में मेला रोकना अनैतिक, संभल के अधिकारी फैला रहे नफरत

मेले का समर्थन करने वालों का क्या तर्क है?
समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने सैयद सालार मसूद गाजी को सूफी संत बताया है। उन्होंने कहा कि सोमनाथ मंदिर पर हमले का जिक्र इतिहास में मिलता है, लेकिन उस समय सैयद सालार मसूद गाजी की उम्र मात्र 11 वर्ष थी। इस हमले में सालार गाजी का जिक्र नहीं है। गाजी 12वीं शताब्दी के महान सूफी संत थे। उनकी याद में याद में जगह-जगह नेजा मेले आयोजित होते हैं। उनकी बहराइच स्थित कब्र पर बड़ा आयोजन होता है। सांसद ने एक्स पर लिखा है कि उस समय इंसानियत पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ सैयद सालार मसूद गाजी ने आवाज उठाई थी। वह इंसानियत की खिदमत करते थे। उनको याद में लगने वाला नेजा मेला रोकना अनैतिक है।
 

इसी तरह सपा विधायक इकबाल महमूद ने भी कहा कि नेजा मेला तो संभल में तब भी लगा जब प्रदेश में राजनाथ सिंह और कल्याण सिंह मुख्यमंत्री थे। किसी तरह की कोई रुकावट नहीं आई। सदियों से यह आयोजन होता चला आ रहा है। इससे किसी को आपत्ति भी नहीं थी। अब एएसपी और सीओ में बोलने की होड़ लगी है। सीओ का समर्थन सीएम योगी आदित्यनाथ ने किया था। इसलिए अब एएसपी भी समर्थन चाहते हैं। इसलिए वह भी बयानबाजी करने में आगे आ रहे हैं। 

UP: संभल में सालार मसूद गाजी की याद में लगने वाले मेले पर रोक, करीब एक हजार साल से लग रहा नेजा मेला

सरकार का इस मामले में क्या तर्क है?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बहराइच की जनसभा में कहा कि किसी भी विदेशी आक्रांता का महिमामंडन देशद्रोह जैसा अपराध है। यह किसी भी स्थिति में क्षम्य नहीं है। स्वतंत्र भारत किसी देशद्रोही को स्वीकार नहीं कर सकता है। भारत के महापुरुषों को जो अपमानित करता हो और आक्रांताओं को महिमामंडित करता हो, उसे नया भारत बर्दाश्त नहीं करेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि बहराइच बालार्क ऋषि की तपोस्थली है। यहां के महाराजा सुहेलदेव के पराक्रम की कहानियां इतिहास में दर्ज हैं। उन्होंने विदेशी आक्रांता सालार मसूद गाजी को पराजित कर ऐसा संदेश दिया कि 150 साल तक किसी ने इस तरफ आंख उठाने की हिम्मत नहीं की। अब यहां के लोगों की जिम्मेदारी है कि महाराजा सुहेलदेव के पराक्रम का सम्मान करें।
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