मुंबई पुलिस के विवादास्पद अधिकारी सचिन वाजे को 16 साल के निलंबन के बाद महाराष्ट्र पुलिस में बहाल किया गया था। लॉकडाउन के दौरान उनके निलंबन को रद्द करने का निर्णय पांच जून, 2020 को हुई एक बैठक में लिया गया। पुलिस में अपनी दूसरी पारी के दौरान वाजे ने कई बड़े मामलों का खुलासा किया था।
एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के रूप में प्रसिद्ध रहे वाजे 2004 से 2020 तक निलंबित रहे थे। उन्होंने 2007 में सेवा से इस्तीफा दे दिया था और एक साल बाद शिवसेना में शामिल हो गए थे। राजनीतिक शौक के अलावा वह अंतरिम वर्षों में टेलीविजन की बहसों में एक जाना-पहचाना चेहरा बन गए थे। वाजे ने अपराध और आतंक पर किताबें लिखे जाने में सहयोग करके और एक सोशल मीडिया पोर्टल चलाकर खुद को व्यस्त रखा।
वाजे के खिलाफ अदालत ने प्रतिकूल टिप्पणियां की थीं। तत्कालीन मुख्य सचिव अजोय मेहता की अध्यक्षता वाली एक समिति व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह और अन्य लोगों ने उन मामलों का अध्ययन किया, जिनमें सहायक निरीक्षक वाजे और तीन कांस्टेबल शामिल थे, जिन्हें पुलिस हिरासत में ख्वाजा यूनुस की कथित हत्या के आरोप में निलंबित कर दिया गया था।
चूंकि वाजे के खिलाफ ख्वाजा यूनुस के लापता होने से जुड़ा आपराधिक मामला एक ट्रायल कोर्ट के समक्ष लंबित था, इसलिए विभाग ने उनके खिलाफ कोई अन्य कार्रवाई शुरू नहीं की थी। ख्वाजा यूनुस दो दिसंबर 2002 के घाटकोपर बम धमाका मामले में संदिग्ध था।
फडणवीस नहीं थे बहाली के पक्ष में
पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने रविवार को मीडिया से कहा, ‘जब मैं सीएम और साथ ही गृह मंत्री था, शिवसेना नेताओं के एक वर्ग ने मुझसे संपर्क किया था। तब मैंने महाधिवक्ता से राय मांगी थी। मुझे बताया गया कि चूंकि वाजे को (बॉम्बे) उच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद निलंबित कर दिया गया था, इसलिए उसे फिर से बहाल करना गलत होगा। यह अदालत के आदेश की अवमानना होगी।’
1990 में पुलिस सेवा में आए, 63 का एनकाउंटर किया
वाजे के बारे में कहा जाता है कि वह जब एक एनकाउंटर स्क्वॉड को लीड करते थे तब उन्होंने 63 अपराधियों का एनकाउंटर किया था। 1990 में वाजे ने महाराष्ट्र पुलिस फोर्स के सब-इंस्पेक्टर के तौर पर जॉइन किया था। उस दौरान उन्होंने कई ऐसे अपराधियों को मारा जिनके कनेक्शन छोटा राजन और दाऊद इब्राहिम गैंग से थे।
1990 में फोर्स जॉइन करने के बाद वाजे कि पहली पोस्टिंग महाराष्ट्र के नक्सल प्रभावित इलाके गढ़चिरौली में हुई थी। वहीं, 1992 में उनका ट्रांसफर ठाणे पुलिस में हुआ, जहां पर उन्होंने कई बड़े मामले सुलझाए और लोगों के बीच पहचाने जाने लगे। इसके बाद उन्हें स्पेशल स्क्वॉयड का इंचार्ज बनाया गया और फिर शुरू हो गई अपराधियों के एनकाउंटर की कहानी।
2004 में वाजे समेत 14 पुलिसकर्मी सस्पेंड हुए
तीन मार्च 2004 में सचिन वाजे के अलावा 14 अन्य पुलिसकर्मियों को ख्वाजा यूनुस नाम के संदिग्ध की पुलिस कस्टडी में मौत हो जाने के चलते सस्पेंड किया गया था। इसके बाद वाजे ने महाराष्ट्र सरकार को उन्हें सेवा में वापस लेने के लिए आवेदन दिया था, जिसे सरकार ने रिजेक्ट कर दिया था। इसके बाद 30 नवंबर 2007 में वाजे ने सेवा से इस्तीफा दे दिया था और फिर 2008 में शिवसेना के दशहरा सम्मेलन में उन्होंने शिवसेना का दामन थाम लिया। इसके करीब 16 साल के बाद छह जून 2020 में उन्हें सर्विस में दोबारा से ले लिया गया और फिलहाल उन्हें क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट का इंचार्ज बनाया गया।
मुंबई हमले पर मराठी में पुस्तक लिखी
बता दें सचिन वाजे ने 26/11 के मुंबई में हुए आतंकी हमले पर ‘जिंकून हरलेली लढाई’ नाम की पुस्तक मराठी भाषा में लिखी है। उन्होंने मुंबई के चर्चित शीना बोरा हत्याकांड औ और डेविड हेडली पर भी किताब लिखी है।