ब्रिटेन में भारतीय छात्रा रश्मि सामंत के साथ हुई नस्लीय भेदभाव की घटना पर भारत ने कड़ा रुख अपनाया है। विदेशमंत्री एस जयशंकर ने कहा, भारत महात्मा गांधी का देश है और कभी भी नस्लवाद से नजरें नहीं फेर सकता। खासतौर पर जब यह घटना ऐसे किसी देश में हो, जहां हमारे लोग इतनी ज्यादा संख्या में रहते हैं। भारत आवश्यकता पड़ने पर ब्रिटेन के साथ इस मुद्दे को जरूर उठाएगा। रश्मि ने नस्लवाद और साइबर बुलिंग से परेशान होकर ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी छात्र संघ अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था।
राज्यसभा में सोमवार को भाजपा सांसद अश्विनी वैष्णव ने रश्मि सामंत के साथ हुए दुर्व्यवहार का मुद्दा उठाया। इस पर जवाब देते हुए जयशंकर ने कहा, भारत के ब्रिटेन के साथ मजबूत संबंध हैं और जब जरूरत होगी, पुरजोर तरीके से इस मुद्दे को उठाएंगे। मैंने सदन की भावनाओं पर ध्यान दिया है। मैं कहना चाहता हूं कि महात्मा गांधी की भूमि से होने के नाते हम कभी भी नस्लवाद को नजरअंदाज नहीं कर सकते। हम इस मुद्दे पर करीब से नजर रख रहे हैं। हम हमेशा ही नस्लवाद और असहिष्णुता के खिलाफ लड़ाई में चैंपियन रहे हैं।
भाजपा सांसद वैष्णव ने शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए कहा, ब्रिटेन में औपनिवेशिक युग का दृष्टिकोण और पूर्वाग्रह निरंतर देखने को मिलते हैं। रश्मि पर नस्लीय टिप्पणियां की गईं। फैकल्टी के सदस्यों ने उनके माता पिता के हिंदू धार्मिक आस्थाओं पर सार्वजनिक रूप से मखौल उड़ाया। वह होनहार छात्रा है, जो सभी चुनौतियों से लड़कर ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी छात्र संघ की अध्यक्ष बनी। क्या उनके साथ इस तरह का व्यवहार होना चाहिए था? अगर ऑक्सफोर्ड जैसे संस्थान में ऐसा होता है तो दुनिया में क्या संदेश जाएगा।
सदन में मेघन मर्केल का जिक्र
वैष्णव ने सदन में प्रिंस चार्ल्स की पत्नी मेघन मर्केल द्वारा ब्रिटिश राजघराने पर नस्लवाद के आरोपों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, समाज का व्यवहार वास्तविकता में उसकी मान्यताओं व मूल्यों का प्रतिबिंब होता है। अगर नस्लवाद की यह प्रथा समाज के सबसे ऊंचे स्तर पर भी होती है तो निम्न वर्ग में क्या होता होगा। हालांकि इन दोनों घटनाओं को अलग नहीं किया जा सकता क्योंकि नस्ल के आधार पर प्रवासियों के साथ क्या सलूक किया जाता है, उसके बारे में दुनिया जानती है।
किसान आंदोलन पर चर्चा का जवाब
राज्यसभा में इस चर्चा को ब्रिटेन की संसद में किसान आंदोलन पर हुई चर्चा का जवाब माना जा रहा है। बीते 8 मार्च को ब्रिटेन की संसद ने भारत में चल रहे किसान आंदोलन पर 90 मिनट चर्चा की थी। इसमें ब्रिटिश सांसदों ने किसान आंदोलन से जुड़े मसलों पर अपने विचार रखे थे।
क्या है मामला
भाजपा सांसद अश्विनी वैष्णव ने संसद को बताया कि ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में भारतीय छात्रा रश्मि सामंत के साथ जो हुआ, वो गलत था। उन्होंने कहा कि रश्मि यूनिवर्सिटी के छात्र संघ की अध्यक्ष चुनी गई थीं, लेकिन उनके कुछ पुराने सोशल मीडिया पोस्ट वायरल होने के बाद उन्हें निशान पर लिया गया और शपथ लेने से पहले ही उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था।
भाजपा सांसद ने कहा कि कर्नाटक के उडूपी की मेधावी छात्रा रश्मि सावंत ने हर चुनौती पार की और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के छात्र संघ के अध्यक्ष पद पर निर्वाचित पहली भारतीय महिला होने का गौरव हासिल किया। लेकिन उनके साथ कैसा सलूक किया गया? उनकी उपलब्धि पर गौरवान्वित होने के बजाय उन्हें निशाना बनाया गया और वह भी इस हद तक कि उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। जिस फैकल्टी सदस्य ने उनके अभिभावकों के धर्म को लेकर सार्वजनिक रूप से प्रतिकूल टिप्पणियां की, उसे कोई सजा नहीं दी गई। अगर ऑक्सफोर्ड जैसे संस्थान में ऐसा होता है तो दुनिया में क्या संदेश जाएगा?’
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि रश्मि ने किसी की भी भावनाओं को गैर इरादतन तरीके से आहत करने के लिए सार्वजनिक रूप से माफीनामा जारी किया था। लेकिन वह मानती हैं कि उन्हें सुनियोजित तरीके से निशाना बनाया गया।
भाजपा सांसद ने ब्रिटेन के युवराज हैरी की पत्नी मेगन मर्केल द्वारा शाही घराने पर लगाए गए नस्लवाद के आरोपों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि एक समाज का आचरण उसके धर्म और मूल्यों का परिचायक होता है। अगर समाज में उच्च स्तर पर नस्लवाद इसी तरह जारी रहा तो निचले स्तर पर लोग किसका अनुसरण करेंगे?
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि यह इक्का दुक्का उदाहरण नहीं हैं बल्कि ब्रिटेन में प्रवासियों के साथ होने वाले सलूक से पूरी दुनिया अवगत है। उन्होंने कहा ‘हमारी चिंता जायज है क्योंकि वहां भारतीय मूल के लोगों की बड़ी संख्या है। ब्रिटेन को अब स्वयं को बदलना होगा। अगर वह खुद के लिए सम्मान चाहता है तो उसे खुद में बदलाव लाना होगा।’