सबरीमाला मंदिर के कपाट शुक्रवार शाम 5 बजे खुल गए। इसको देखते हुए मंदिर और उसके पास के इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। केरल के आईजीपी विजयन ने बताया कि 15 हजार पुलिसकर्मियों को मंदिर और उसके आसपास के इलाकों में तैनात किया गया है। इनमें करीब 900 महिला पुलिसकर्मी शामिल हैं। बृहस्पतिवार रात से मंदिर और उसके आसपास धारा 144 लागू है। निजी वाहनों के मंदिर की ओर जाने पर प्रतिबंध है। राज्य परिवहन की बसों से श्रद्धालु पम्बा और निलाक्कल तक पहुंच सकेंगे।
किसी महिला को नहीं मिला प्रवेश
28 सितंबर के शीर्ष अदालत के आदेश के बाद से तीसरी बार सबरीमाला मंदिर खोला गया। हालांकि अब तक प्रतिबंधित आयु (10 से 50 साल) की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश नहीं मिल सका है। भगवान अयप्पा के भक्तों के अलावा हिंदूवादी संगठन, भाजपा और कांग्रेस मंदिर में महिलाओं के प्रवेश का विरोध कर रहे हैं। इस मसले पर बृहस्पतिवार को केरल सरकार की ओर से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक भी बेनतीजा थी।
मंदिर के लिए महिला एक्टिविस्ट इतनी उत्सुक क्यों: तसलीमा
विवादित बांग्लादेशी लेखक तसलीमा नसरीन ने सबरीमाला मामले पर कहा कि वह इस बात से हैरान हैं कि महिला सामाजिक कार्यकर्ता मंदिर में प्रवेश को लेकर इतनी उत्सुक क्यों हैं। भारत में निर्वासन का जीवन जी रहीं तसलीमा ने कहा कि मंदिर जाने के बजाय ऐसी सामाजिक कार्यकर्ताओं को ग्रामीण इलाकों में जाना चाहिए, जहां महिलाओं से जुड़ी ढेरों समस्याएं हैं। उन्होंने कहा कि आज भी गांवों में महिलाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य और नौकरी, समान वेतन जैसी समस्याओं से जूझना पड़ रहा है।