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सबरीमाला: बिना दर्शन वापस लौटीं तृप्ति का मुंबई में भी हुआ विरोध, कहा- दोबारा फिर जाऊंगी

Sat, 17 Nov 2018 07:19 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोच्ची
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तृप्ति देसाई - फोटो : ANI
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केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर विरोध जारी है। मंदिर में दर्शन के लिए शुक्रवार तड़के पुणे से कोच्चि पहुंचीं भूमाता ब्रिगेड की संस्थापक तृप्ति देसाई और उनकी छह महिला साथियों को भारी विरोध का सामना करना पड़ा। सामाजिक कार्यकर्ता तृप्ति और उनकी महिला साथी एयरपोर्ट से बाहर नहीं निकल पाईं। करीब 14 घंटे तक कोच्चि एयरपोर्ट पर बिताने के बाद उन्हें मुंबई वापस लौटना पड़ा। यहां भी उन्हें भक्तों के विरोध का सामना करना पड़ा। जिसकी वजह से वह बाहर नहीं निकल पाई। इसके बाद केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षाबलों और मुंबई पुलिस की मदद से उन्हें और उनकी साथियों को बाहर निकाला गया।

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भगवान अयप्पा के दर्शनों के बिना मुंबई हवाई अड्डे लौटीं तृप्ति देसाई ने कहा, 'विरोध करने वाले लोग हिंसा और गुंडागर्दी पर उतारू हो रहे थे। वे लोग खुद को भगवान अयप्पा का भक्त कह रहे थे, लेकिन मुझे नहीं लगता कि वो लोग भक्त हो सकते हैं। पुलिस ने हमसे कहा कि वह हमें अगली बार सुरक्षा देंगे। हमने वापस आने का निर्णय इसलिए लिया क्योंकि हम अपनी वजह से हिंसा नहीं होने देना चाहते थे। इस बार हम वहां घोषणा करके गए थे लेकिन अगली बार हम बिना घोषणा के जाएंगे और गुरिल्ला रणनीति अपनाएंगे।'

तृप्ति देसाई ने आगे कहा, 'हमें एयरपोर्ट पर रोका गया था। अगर वह लोग विरोध ही करना चाहते थे तो निलक्कल में भी विरोध कर सकते थे, लेकिन वह जानते थे कि यदि हम निलक्कल पहुंच गए तो दर्शन करके ही वापस लौटेंगे। वह लोग डर गए थे, इसीलिए उन्होंने हमें एयरपोर्ट पर रोका।'
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तृप्ति ने एलान किया था कि वो मंदिर में दाखिल होंगी और भगवान अयप्पा के दर्शन करेंगी। लेकिन प्रदर्शनकारियों ने कोच्चि एयरपोर्ट से उन्हें सबरीमाला मंदिर नहीं जाने दिया। शुक्रवार शाम मंदिर के कपाट दो महीने के लिए खोले गए और वार्षिक पूजा हुई। वहीं एहतियात के तौर पर मंदिर परिसर में भारी संख्या में पुलिस कमांडो तैनात किये गये हैं। मंदिर में हर उम्र की महिलाओं को प्रवेश दिए जाने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का केरल में विरोध हो रहा है।

इससे पहले, तृप्ति के कोच्चि पहुंचने की खबर मिलते ही बड़ी संख्या में पुरुष और महिला प्रदर्शनकारी एयरपोर्ट के बाहर जमा हो गए। प्रदर्शनकारियों ने तृप्ति के खिलाफ नारे लगाए और उन्हें वापस जाने को कहा। एयरपोर्ट पर जमा स्थानीय भाजपा नेताओं ने कहा कि वो तृप्ति को सबरीमाला मंदिर जाना तो दूर एयरपोर्ट से बाहर तक नहीं आने देंगे। भाजपा नेताओं का आरोप है कि तृप्ति और उनकी टीम की महिलाएं यहां दर्शन के लिए नहीं बल्कि मंदिर की सदियों पुरानी प्रथा तोड़ने और शांतिपूर्ण माहौल को भंग करने आई हैं। टैक्सी ड्राइवरों ने कहा कि वे तृप्ति और उनकी महिला साथियों को एयरपोर्ट से बाहर नहीं ले जाएंगे। 

बिना दर्शन वापस नहीं जाऊंगी: तृप्ति

हंगामे को देखते हुए बड़ी संख्या में पुलिस एयरपोर्ट पहुंची और स्थिति को काबू करने का प्रयास किया। पुलिस अधिकारियों ने तृप्ति और उनकी टीम की महिला साथियों से भी की। लेकिन तृप्ति मंदिर में दर्शन की अपनी बात पर डटी रहीं। मीडिया से फोन पर बात करते हुए तृप्ति ने कहा, ‘दर्शन किए बगैर वह महाराष्ट्र वापस नहीं जाएंगी। मुझे पूरा विश्वास है कि केरल सरकार मुझे और मेरी टीम को सुरक्षा मुहैया कराएगी। इस संबंध में मैंने मुख्यमंत्री पिनराई विजयन को ईमेल भी किया है।’ बताते चलें कि तृप्ति शनि शिंगणापुर मंदिर, हाजी अली दरगाह, महालक्ष्मी मंदिर और त्र्यंबकेश्वर शिव मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर आंदोलन कर चुकी हैं। 

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15 हजार पुलिस के जवान तैनात

सबरीमाला मंदिर के कपाट शुक्रवार शाम 5 बजे खुल गए। इसको देखते हुए मंदिर और उसके पास के इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। केरल के आईजीपी विजयन ने बताया कि 15 हजार पुलिसकर्मियों को मंदिर और उसके आसपास के इलाकों में तैनात किया गया है। इनमें करीब 900 महिला पुलिसकर्मी शामिल हैं। बृहस्पतिवार रात से मंदिर और उसके आसपास धारा 144 लागू है। निजी वाहनों के मंदिर की ओर जाने पर प्रतिबंध है। राज्य परिवहन की बसों से श्रद्धालु पम्बा और निलाक्कल तक पहुंच सकेंगे।

किसी महिला को नहीं मिला प्रवेश
28 सितंबर के शीर्ष अदालत के आदेश के बाद से तीसरी बार सबरीमाला मंदिर खोला गया। हालांकि अब तक प्रतिबंधित आयु (10 से 50 साल) की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश नहीं मिल सका है। भगवान अयप्पा के भक्तों के अलावा हिंदूवादी संगठन, भाजपा और कांग्रेस मंदिर में महिलाओं के प्रवेश का विरोध कर रहे हैं। इस मसले पर बृहस्पतिवार को केरल सरकार की ओर से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक भी बेनतीजा थी।


मंदिर के लिए महिला एक्टिविस्ट इतनी उत्सुक क्यों: तसलीमा
विवादित बांग्लादेशी लेखक तसलीमा नसरीन ने सबरीमाला मामले पर कहा कि वह इस बात से हैरान हैं कि महिला सामाजिक कार्यकर्ता मंदिर में प्रवेश को लेकर इतनी उत्सुक क्यों हैं। भारत में निर्वासन का जीवन जी रहीं तसलीमा ने कहा कि मंदिर जाने के बजाय ऐसी सामाजिक कार्यकर्ताओं को ग्रामीण इलाकों में जाना चाहिए, जहां महिलाओं से जुड़ी ढेरों समस्याएं हैं। उन्होंने कहा कि आज भी गांवों में महिलाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य और नौकरी, समान वेतन जैसी समस्याओं से जूझना पड़ रहा है।
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