सबरीमाला मंदिर को लेकर जब से उच्चतम न्यायालय ने आदेश दिया है तभी से यहां काफी विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं। न्यायालय के आदेश के बाद दो बार मंदिर के कपाट खुल चुके हैं। लेकिन एक बार भी 10 से 50 साल की उम्र वाली महिला को अयप्पा के दर्शन करने नहीं दिए गए हैं। इसी बीच दो महीने तक चलने वाले मंडलम-मकराविलक्कू के लिए अगले हफ्ते मंदिर के दरवाजे खुलने वाले हैं।
सबरीमाला मंदिर खुलने से पहले 10 से 50 साल के बीच की 550 महिलाओं ने केरल पुलिस की ऑनलाइन दर्शन सुविधा के जरिए दर्शनों के लिए आवेदन किया है। हर साल त्योहार के दौरान केरल पुलिस वर्चुअल क्यू प्रणाली का संचालन करती है। यह तिरुपति मंदिर के समान है। जहां तीर्थयात्री सबरीमाला में दर्शन करने के लिए अपनी पसंद की तारीख और समय का चुनाव कर सकते हैं।
कुछ साल पहले इस प्रणाली की शुरुआत की गई थी ताकि मंडलम-मकराविलक्कू अवधि के दौरान मंदिर आने वाली भीड़ को नियंत्रित किया जा सके। इस साल वर्चुअल क्यू की शुरुआत उच्चतम न्यायालय के आदेश के बमुश्किल दो महीने बाद हुई है। न्यायालय ने हर उम्र की महिलाओं के लिए मंदिर के द्वार खोलने का आदेश दिया है। जिसका लोग भारी विरोध कर रहे हैं। फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए कई याचिकाएं दायर की जा चुकी हैं।
राज्य सरकार ने मंदिर के आस-पास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। इससे पहले प्रतिबंधित उम्र की महिलाओं को दर्शनों के लिए भारी
पुलिसबल की मौजूदगी में मंदिर ले जाने की कोशिश भी हुई लेकिन प्रदर्शनकारियों के उग्र रूप को देखकर महिलाएं वापस लौट आईं। मंदिर के तंत्री ने भी धमकी देते हुए कहा था कि यदि प्रतिबंधित उम्र की कोई महिला मंदिर के अंदर आती है तो वह मंदिर को बंद कर देंगे।
पिछले कुछ दिनों में 3.5 लाख लागों ने वर्चुअल कयू में अपना पंजीकरण करवाया है। इनमें से 40,000 ने कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम में निलक्कल से पंबा तक के लिए बस टिकट बुक कर लिए हैं। हालांकि पुलिस इस सुविधा के माध्यम से पंजीकृत 550 'महिलाओं' की पहचान के बारे में निश्चित नहीं है। वेबसाइट कोई पहचानपत्र नहीं मांगता है। ऐसे में हो सकता है कि यह लोग असल में महिला न हों।