शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में एक लेख लिखकर केंद्र सरकार पर पुडुचेरी में सरकार गिराने का आरोप लगाया है। सामना के संपादकीय में शिवसेना ने लिखा कि पुडुचेरी में उपराज्यपाल रहीं किरण बेदी नारायणसामी को ठीक से काम नहीं करने दिया और भाजपा ने एक छोटा सा राज्य भी कांग्रेस के हाथ से छीन लिया।
शिवसेना ने अपने मुखपत्र में आरोप लगाया कि भाजपा अब मार्च-अप्रैल में महाराष्ट्र में ऑपरेशन लोटस की शुरुआत करेगी। अपने संपादकीय में शिवसेना ने लिखा कि जब मध्यप्रदेश में भाजपा ने सरकार गिराई तब 'अगला वार महाराष्ट्र पर' की घोषणा की गई थी।
शिवसेना ने लिखा कि इसके बाद 'बिहार का परिणाम आने दो, फिर देखो महाराष्ट्र में कैसे परिवर्तन लाते हैं' जैसी बातें कही गई थीं। शिवसेना ने आगे लिखा कि जैसे दिल्ली बहुत दूर है, वैसे ही महाराष्ट्र तो बहुत ही दूर है। शिवसेना ने आगे लिखा कि महाराष्ट्र में शिवसेना है, इसलिए किसी तरह की उठापटक के चक्कर में ना पड़े।
'कढ़ी पत्ते की तरह राज्यपाल का इस्तेमाल किया'
शिवसेना ने सामना में यह भी लिखा कि भाजपा राज्यपाल का इस्तेमाल कढ़ी पत्ते की तरह करती है, जिसे काम निकलने के बाद फेंक दिया जाता है। शिवसेना ने लिखा कि किरण बेदी का भी इस्तेमाल कर उन्हें फेंक दिया गया है। पुडुचेरी में मुख्यमंत्री ने जनहित में कई काम किए लेकिन किरण बेदी ने उनमें अड़चनें डाली।
'पुडुचेरी में जो हुआ वो राजनैतिक वेश्यावृत्ति'
शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए लिखा कि पुडुचेरी में जो हुआ, वो किसी राजनैतिक वेश्यावृत्ति से कम नहीं। पूर्व मुख्यमंत्री नारायणसामी ने भी ऐसा दुख जताया है। शिवसेेना ने लिखा कि एक समय में दक्षिण भारत में कांग्रेस का बोलबाला था लेकिन अब उनके हाथ में वो छोटा-सा राज्य भी नहीं रहा। अब देश में पंजाब, राजस्थान, छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार बची है।
झारखंड को अस्थिर करने की कोशिश
शिवसेना ने सामना में लिखा कि भाजपा अब झारखंड को अस्थिर करने की कोशिश कर रही है। इसके लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पीछे केंद्रीय जांच एजेंसी को लगा दिया है। यह माहौल लोकतंत्र के लिए घातक है। शिवसेना ने आगे लिखा कि पश्चिम बंगाल से पुडुचेरी तक और महाराष्ट्र से जम्मू-कश्मीर तक दलबदलुओं के लिए लाल कालीन बिछाना और राजनीतिक मोहरों का खेल चलना किसी को शोभा नहीं देता।
शिवसेना ने आगे लिखा कि महाराष्ट्र का मन गंभीर है और इरादे पक्के हैं। मध्यप्रदेश और पुडुचेरी का खेल महाराष्ट्र की माटी में नहीं चल सकता।