रॉकेट और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग के विशेषज्ञ एस सोमनाथ को इसरो का नया प्रमुख नियुक्त किया गया है। इस रिपोर्ट में पढ़िए एस सोमनाथ के बारे में, कैसा रहा है उनका करियर...
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) को अपना नया प्रमुख मिल गया है। विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (वीएसएससी) के निदेशक और इसरो के प्रमुख वैज्ञानिक एस सोमनाथ को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। सोमनाथ रॉकेट इंजीनियरिंग और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग के विशेषज्ञ हैं। वह अपने करियर के शुरूआती दौर में पीएसएलवी पर काम कर चुके हैं।
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सोमनाथ केरल के तिरुवनंतपुरम स्थित लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम सेंटर (एलपीएससी) के निदेशक की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। उन्होंने भारी सैटेलाइट की लॉन्चिंग के लिए जीएसएलवी एमके-3 लॉन्चर के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके अलावा वह पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (पीएसएलवी) के एकीकरण के लिए दल का नेतृत्व कर चुके हैं।
पश्चिमी देशों के मदद रोकने के बाद भी तैयार किया जीएसएलवी सिस्टम
जीएसएलवी एमके-3 भारत का सबसे महत्वपूर्ण स्पेस व्हीकल है। जीएसएलवी (जियोसिंक्रोनल सैटेलाइट लांच व्हीकल) भारत में नहीं बन सकता था और पश्चिमी देशों ने इसके लिए प्रौद्योगिकी उपलब्ध कराना बंद कर दिया था। एस सोमनाथ के प्रयासों के चलते इन समस्याओं के बाद भी भारत जीएसएलवी और इसके आधुनिक संस्करण बनाने में सफल रहा।
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मैकेनिकल इंजीनियरिंग में किया स्नातक, एयरोस्पेस में परास्नातक डिग्री
सोमनाथ ने कोल्लम के टीकेएम कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक और आईआईएस (भारतीय अंतरिक्ष संस्थान) बेंगलुरु से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में परास्नातक की डिग्री हासिल की थी। साल 1985 में वह वीएसएससी के साथ जुड़े थे। जून 2010 से 2014 तक वह जीएसएलवी एमके-3 के परियोजना प्रबंधक (प्रोजेक्ट मैनेजर) रहे थे।
सोमनाथ ने लॉन्च व्हीकल डिजाइन तैयार करने में दिए हैं अहम योगदान
उन्हें लॉन्च व्हीकल की डिजाइन तैयार करने में अपने योगदानों के लिए जाना जाता है। वह लॉन्च व्हीकल की सिस्टम इंजीनियरिंग, स्ट्रक्चरल डिजाइन, स्ट्रक्चरल डायनामिक्स और पायरोटेक्निक्स के माहिर माने जाते हैं। सोमनाथ 22 जनवरी 2018 से वीएसएससी की कमान संभाल रहे थे। नए इसरो प्रमुख के रूप में अब उन्होंने के सिवान की जगह ली है।