विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को कहा कि दुनिया इस समय बदलाव और उथल पुथल के दौर में प्रवेश कर रही है। उन्होंने कहा, ''संघर्षों और टैरिफ में अस्थिरता के कारण वैश्विक परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण बनी हुई हैं। ऐसे में इन मुश्किल परिस्थितियों से निपटना मौजूदा समय की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।''
जयशंकर ने कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि भारत इन चुनौतियों का सामना करने में सफल रहेगा। वह दिल्ली में आयोजित पांचवें कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन के समापन सत्र में संवाद के दौरान बोल रहे थे। इस वर्ष सम्मेलन की मुख्य विषयवस्तु अस्थिरता के दौर में मजबूती रही। समापन सत्र में जयशंकर के साथ सिंगापुर के पूर्व विदेश मंत्री जॉर्ज योंग बून येओ भी मौजूद थे।
उथल-पुथल से भरा हो सकता है आने वाला समय : जयशंकर
भू राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच आने वाली चुनौतियों को लेकर पूछे गए सवाल पर जयशंकर ने कहा कि दुनिया में बदलाव और अस्थिरता का दौर चल रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाला समय उथल-पुथल और अनिश्चितताओं से भरा हो सकता है। उन्होंने कहा कि दुनिया दो बड़े संघर्षों का सामना कर रही है और इसके अलावा भी कई तरह के तनाव मौजूद हैं। गैर बाजार कारकों का दबाव और शुल्कों में अस्थिरता भी वैश्विक परिस्थितियों को प्रभावित कर रही है।
जयशंकर ने कहा, "इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए यह मुश्किल दौर है।" उन्होंने कहा कि भारत के पिछले अनुभव बताते हैं कि देश ने कई बड़ी चुनौतियों का सामना किया है। चाहे वह कोविड महामारी हो या मौजूदा समय में एक साथ सामने आई दो संघर्षों की चुनौती, भारत ने परिस्थितियों के अनुरूप खुद को संभाला है।
भारत की ऊर्जा, खाद्य और उर्वरक जैसी जरूरतों पर क्या बोले विदेश मंत्री?
विदेश मंत्री ने ऊर्जा, खाद्य और उर्वरक जैसी जरूरतों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन सभी चुनौतियों को भारत को अपनी सोच, योजना और प्रतिक्रिया का हिस्सा बनाना होगा। उन्होंने कहा कि यही इस समय देश के सामने मौजूद मुख्य जिम्मेदारी है। जयशंकर ने कहा, "मुझे पूरा भरोसा है कि हम इस चुनौती का सामना करने में सफल रहेंगे।"
वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूती से उठाने की भारत की भूमिका पर भी जयशंकर ने बात की। उन्होंने कहा कि वैश्विक दक्षिण को उम्मीद है कि भारत विश्व मंच पर उसकी आवाज को मजबूती से सामने रखेगा।
रूस-यूक्रेन संघर्ष और संयुक्त राष्ट्र का किया जिक्र
रूस यूक्रेन संघर्ष को लेकर जयशंकर ने कहा कि भारत का मानना है कि आगे बढ़ने का रास्ता संवाद और कूटनीति से होकर जाता है। संयुक्त राष्ट्र और अन्य बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार की जरूरत पर उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र में गतिरोध बना हुआ है। उन्होंने कहा कि कुछ देश इन संस्थाओं में सुधार का विरोध कर रहे हैं।