इस दौरान रूसी राष्ट्रपति ने अमेरिका पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अमेरिका सहित कई पश्चिमी देश दूसरे देशों के अस्तित्व को नकारना चाहते हैं। इनका संशोधनवादी एजेंडा है। अमेरिका दुनिया में ऐसा वैकल्पिक नजरिया बढ़ाना चाहता है जो प्रतिस्पर्धी होने के साथ-साथ विभाजनकारी भी है।
सवाल उठता है कि हम क्यों उनके नजरिये को अपनाएं जब दुनिया में पहले ही ऐसी कई रणनीतियां हैं जो विचारशील और समावेशी है। रूसी राजदूत ने कहा कि पश्चिमी देशों के विचार चिंता पैदा करने वाले हैं। अमेरिका चीन को मिटाना चाहता है।
रूस के डिप्टी चीफ ऑफ मिशन रामन बाबुशकिन ने चीन-रूस-ईरान के संयुक्त नौसैनिक युद्घाभ्यास में भारत को शामिल नहीं किए जाने पर उन्होंने कहा कि रूस देखेगा कि ऐसा क्यों हुआ। उन्होंने इस युद्घाभ्यास को जमीनी स्थिति को समझने की दिशा में उठाया गया कदम बताया।
बाबुशकिन ने कहा कि न्योता नहीं दिए जाने से भारत और रूस के संबंध खराब नहीं होंगे। हमारे हिस्से में रूस और भारतीय नौ सेना में अच्छा संपर्क है। जहां तक प्रतिबंध (ईरान पर) का सवाल है तो ऐसे प्रतिबंधों से भारत-रूस के संबंधों में दूरी नहीं आने वाली।