चार्जशीट में सिंघल की हेराफेरी का उदाहरण भी दिया गया। बताया गया कि 1 अप्रैल 2007 से 31 मार्च 2014 के बीच करीब 2348 करोड़ रुपये विभिन्न कंपनियों को एडवांस के तौर पर भुगतान में दिए गए, लेकिन इस भुगतान का कोई उद्देश्य दर्ज नहीं किया गया और बाद में यह पैसा उन मुखौटा कंपनियों से निकाल लिया गया।
ऐसे की गई हेराफेरी
चार्जशीट में कहा गया है कि सिंघल ने अपने गलत मंसूबों को अमल में लाने के लिए हेराफेरी के अलग-अलग तौर-तरीकों पर काम किया था। ऐसे ही एक तरीके में विभिन्न कंपनियों को कच्चा माल खरीदने के लिए बड़ी रकम देना दिखाया गया, लेकिन वास्तव में कोई कच्चा माल आया ही नहीं।
इस रकम को लान्ड्रिंग के जरिये कृत्रिम तरीके से 695.14 करोड़ रुपये के दीर्घकालिक पूंजीगत निवेश (एलटीसीजी) में बदल लिया गया। यह रकम सिंघल और उसके परिजनों ने बीपीसीएल में ही अपने हिस्से के तौर पर निवेशित कर दी, लेकिन वास्तव में यह बीपीसीएल की ही अपनी रकम थी।