भारत ने रूस के साथ एस-400 सर्फेस टू एयर मिसाइल सिस्टम का सौदा किया है। रूस अक्तूबर 2020 से मिसाइल के पहले स्कवाड्रन की डिलीवरी शुरू कर देगा। सभी पांच स्कवाड्रन की डिलिवरी अप्रैल 2023 तक हो जाएंगी। रक्षा राज्यमंत्री सुभाष भामरे ने लोकसभा में बुधवार को कहा, 'एस-400 सिस्टम से भारत को संवेदनशील हवाई सुरक्षा की ताकत मिल जाएगी।'
भारत ने पिछले साल 5 अक्तूबर को 5.43 बिलियन डॉलर (40,000 करोड़) के कांट्रैक्ट पर रूस के साथ हस्ताक्षर किए थे। इस कांट्रैक्ट के तहत रूस भारत को 400 मिसाइल सिस्टम देगा। भारत ने यह रक्षा सौदा अमेरिका की उस धमकी के बाद भी किया था, जिसमें उसने रूस से हथियार या ईरान से तेल खरीदने वाले देशों पर काट्सा के तहत प्रतिबंध लगाने की बात कही थी।
भामरे ने कहा भारत सरकार ने उन सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद यह सौदा किया है जिससे कि उसपर प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने आगे कहा, 'सुरक्षा चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने पूरी संप्रभुता के साथ यह फैसला लिया है।' किसी भी परिस्थिति में किसी भी तरह की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में सुरक्षाबलों को सक्षम बनाए रखने के लिहाज से यह सौदा काफी महत्वपूर्ण है।
इस मिसाइल के जरिए भारत 380 किलोमीटर की दूरी तक बाम्बर्स, जेट्स, जासूस विमानों, मिसाइलों और ड्रोन्स का पता लगाकर उन्हें तबाह कर सकता है। इसके जरिए भारत अपनी हवाई रक्षा को मजबूती प्रदान करना चाहता है। इन्हें चीन, पाकिस्तान के साथ ही नई दिल्ली में तैनात किया जाएगा। भारत ने साल 2015 में इस मिलाइल सौदे की प्रक्रिया को शुरू किया था। केंद्रीय मंत्रिमंडल की सुरक्षा समिति ने इसे पिछले साल 26 सितंबर को मंजूरी दी थी।