शुक्रवार को रूस के नेशनल सेंटर फॉर स्टेट डिफेंस कंट्रोल ने एक बयान जारी किया है। इसमें कहा गया है कि यूक्रेन में फंसे भारतीयों को निकालने के लिए 130 बसें चलाई जाएंगी। इस बसों की मदद से यूक्रेन के 'खारकीव और सुमी' में फंसे भारतीय छात्रों को बाहर निकाला जाएगा। हालांकि अभी तक भारत सरकार की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। राहुल गांधी के बयान पर भाजपा नेता अमित मालवीय ने कहा, उनके पिता राजीव गांधी 1971 की जंग के वक्त एयर इंडिया में पायलट थे। उस वक्त वे छुट्टी पर चले गए थे। इसी तरह 1977 में जब तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी चुनाव हार गई थीं, तो गांधी परिवार इटली के दूतावास में दुबक गया था। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि यूक्रेन में फंसे 17,000 भारतीयों को अभी तक वहां से निकाला जा चुका है। लगभग तीन हजार बाकी बचे लोगों को भी सुरक्षित स्वदेश लाने के प्रयास जारी हैं।
सद्दाम हुसैन ने गुजराल को लगाया था गले
साल 1990 में जब कुवैत पर हमला हुआ तो वहां करीब पौने दो लाख भारतीय फंसे हुए थे। तत्कालीन पीएम वीपी सिंह ने विदेश मंत्री इंद्रकुमार गुजराल को इराक भेजा था। राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन ने गुजराल को गले से लगा लिया था। यहीं से भारत की जीत शुरू हो गई। कुवैत में फंसे भारतीयों की सुरक्षित स्वदेश वापसी सुनिश्चित करने के लिए अगस्त 1990 में ऑपरेशन शुरू कर दिया गया। जो ग्रीन कॉरिडोर तैयार हुआ, वह कुवैत से इराक के रास्ते जॉर्डन बॉर्डर तक पहुंचता था। लेबनान के युद्धग्रस्त क्षेत्रों के भीतर जाकर भारतीयों को बाहर निकाला गया था। हालांकि अब यूक्रेन में ऐसा कोई देश जो लड़ाई में शामिल नहीं है, अंदर नहीं जा सका है। वजह, लड़ाई में रूस और नाटो आमने-सामने है। ये बात अलग है कि नाटो की सेनाएं यूक्रेन में नहीं हैं। अभी जो भारतीय मुसीबत में फंसे हैं, उन्हें निकालने के लिए सीजफायर होना जरूरी है