सार
कांग्रेस ने रूस द्वारा पाकिस्तान को JF-17 फाइटर जेट्स के इंजन देने पर मोदी सरकार से जवाब मांगा है। जयराम रमेश ने इसे पीएम मोदी की छवि-आधारित कूटनीति की विफलता बताया और कहा कि भारत की अपीलों के बावजूद डील आगे बढ़ना चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि रूस से हथियार खरीदते हुए भी पाकिस्तान को सैन्य मदद मिलना सवाल खड़ा करता है।
रूस और पाकिस्तान के बीच सैन्य सौदे को लेकर अब भारत में राजनातिक गर्माहट तेज हो गई है। कारण है कि कांग्रेस पार्टी ने शनिवार को मोदी सरकार से इस मामले में तीखे सवाल पूछे हैं। पार्टी ने कहा कि कभी भारत का सबसे भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार रहा रूस अब पाकिस्तान को क्यों सैन्य मदद दे रहा है। कांग्रेस ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की व्यक्तिगत छवि आधारित कूटनीति की विफलता बताया है।
मामले में कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि रूस ने भारत की अपीलों को नजरअंदाज करते हुए पाकिस्तान के लिए चीन निर्मित जेएफ-17 लड़ाकू विमानों में इस्तेमाल होने वाले एडवांस इंजन RD-93MA की सप्लाई जारी रखी है। उन्होंने कहा कि यह वही विमान हैं जिनका इस्तेमाल ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारत के खिलाफ किया गया था।
रमेश ने लगाए गंभीर आरोप
कांग्रेस नेता रमेश ने आरोप लगाया कि जून में विदेश मंत्री एस जयशंकर के हस्तक्षेप के बावजूद यह डील आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि जब भारत रूस से S-400 मिसाइल सिस्टम खरीद रहा है और Su-57 स्टील्थ फाइटर जेट्स पर बातचीत कर रहा है, तब रूस का पाकिस्तान को हथियार देना चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीति केवल इवेंट और फोटो खिंचवाने तक सीमित रह गई है, जिससे भारत को असल फायदे नहीं मिल रहे हैं।
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पीएम मोदी के वैश्चिक नीति पर उठाए सवाल
इसके साथ ही रमेश ने यह भी आरोप लगाया कि भारत अब तक पाकिस्तान को कूटनीतिक रूप से अलग-थलग करने में असफल रहा है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर, जिन्होंने हाल ही में सांप्रदायिक भड़काऊ बयान दिए, उन्हें ट्रंप जैसे नेताओं का समर्थन मिल रहा है और रूस हथियार दे रहा है। वहीं चीन भी पाकिस्तान के साथ पूरी तरह खड़ा है। मामले में कांग्रेस ने सरकार से साफ-साफ जवाब मांगा है कि भारत के पुराने भरोसेमंद साथी रूस ने ऐसा रुख क्यों अपनाया है, और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
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