राज्यपाल सीवी आनंद बोस द्वारा राज्य चुनाव आयुक्त (एसईसी) राजीव सिन्हा को राजभवन में तलब किए जाने के कुछ घंटे बाद वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि वह पंचायत चुनावों में व्यस्त होने के कारण उनसे नहीं मिल पाएंगे। सिन्हा ने बोस से अनुरोध किया कि उन्हें दिन में पेश होने से छूट दी जाए और उन्हें 'किसी अन्य दिन' मिलने का समय दिया जाए। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।
अधिकारी ने कहा कि सिन्हा बच नहीं रहे हैं। उन्होंने केवल आज के लिए ही छूट मांगी है। उन्होंने राज्यपाल से अनुरोध किया है कि उन्हें किसी अन्य दिन का समय दिया जाए। बोस ने सिन्हा को राज्य में हिंसा और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी देने के लिए शनिवार दोपहर दो बजे राजभवन बुलाया था।
इससे पहले सीवी आनंद बोस ने नामांकन पंचायत चुनाव के दौरान हिंसा के प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया। दक्षिण 24 परगना दौरे के बाद उन्होंने कहा कि मैंने खुद यहां आकर हिंसा प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया, लोगों की बातें सुनी। जो घटना घटी मैं उससे व्यथित हूं। यह बिल्कुल भी सहनीय नहीं है। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने एक फैसला दिया। एक राज्यपाल के रूप में मेरी भी कुछ जिम्मेदारियां हैं, मुझे और हम सबको संविधान की रक्षा करनी है।
वहीं, शुक्रवार को भंगोर का दौरा करने के बाद राज्यपाल ने कहा था कि राजनीतिक हिंसा को खत्म करने के लिए कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने आश्वासन दिया था कि अपराधियों को स्थायी रूप से चुप कराया जाएगा और उन्हें न्याय के कटघरे में लाया जाएगा। स्थानीय निवासियों और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से बात करने के बाद बोस ने कहा था कि हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जिला परिषधों, पंचायत समितियों और ग्राम पंचायतों के लिए लगभग 74 हजार उम्मीदवार मैदान में हैं। राज्य के त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों के लिए पांच करोड़ से ज्यादा मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने के पात्र हैं।
बंगाल सरकार से मेरे बहुत अच्छे कामकाजी संबंध:बोस
इस बीच पश्चिम बंगाल के राज्यपाल ने कहा कि सहमति और असहमति के बावजूद उनके ममता बनर्जी सरकार के साथ उत्कृष्ट कामकाजी संबंध हैं। संवेदनशील मुद्दों पर उनके और राज्य सरकार के बीच चर्चा होती रही है, लेकिन हर बार वे एक-दूसरे का सम्मान करत हैं। बोस ने कहा कि प्राथमिक लक्ष्य पश्चिम बंगाल के लोगों का कल्याण है और उन्हें राज्य सरकार की ओर से कभी बाधा का सामना नहीं करना पड़ा।