आरटीआई से हासिल जानकारी पर आधारित अध्ययन का डाटा दर्शाता है कि एक जनवरी, 2016 से 31 दिसंबर, 2021 के बीच 9,681 बच्चों को गलत तरीके से वयस्क जेल में रखा गया। देश की किशोर न्याय व्यवस्था को प्रभावित करने वाली यह चिंताजनक तस्वीर एक अध्ययन भारतीय जेलों में कैद बच्चे से सामने आई है।
देशभर में हर साल बाल अपराधों में शामिल होने के कारण पकड़े जाने वाले औसतन 1,600 बच्चे किशोर गृह के बजाय गलत तरीके से वयस्क जेलों में बंद कर दिए जाते हैं। देश की किशोर न्याय व्यवस्था को प्रभावित करने वाली यह चिंताजनक तस्वीर एक अध्ययन भारतीय जेलों में कैद बच्चे से सामने आई है।
आरटीआई से हासिल जानकारी पर आधारित अध्ययन का डाटा दर्शाता है कि एक जनवरी, 2016 से 31 दिसंबर, 2021 के बीच 9,681 बच्चों को गलत तरीके से वयस्क जेल में रखा गया। कानूनी अधिकार संस्था आईप्रोबोनो का यह अध्ययन दर्शाता है कि कैसे लापरवाह रवैया अपनाते हुए बच्चों और किशोरों की उम्र के बारे में पुख्ता ढंग से पुष्टि किए बिना ही उन्हें वयस्क जेल भेज दिया जाता है।
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वयस्क जेलों में बंद इन बच्चों की किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) नेे पहचान की है और उन्हें किशोर गृह स्थानांतरित किया है। अध्ययन में यह निष्कर्ष निकाला गया कि यह आंकड़ा कुल 570 में से 285 जिला और केंद्रीय जेलों की तरफ से दी गई सूचना पर आधारित है। इनमें उप जेलें, महिला जेलें, खुली जेलें, विशेष जेलें, बोर्स्टल स्कूल शामिल हैं। मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, नगालैंड और लद्दाख आवश्यक डाटा मुहैया कराने में विफल रहे।