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दशक का सबसे खर्चीला चुनावी साल था वर्ष 2012 

Thu, 12 Jan 2017 02:28 PM IST
अमित कुमार निरंजन/ अमर उजाला, दिल्ली
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हाल ही में चुनाव खर्च कम करने के लिए लोकसभा और विधानसभा चुनाव साथ कराने पर जोर दिया। यह सुझाव इसलिए भी और अहम हो जाता है क्योंकि वर्ष 2012 एक दशक का सबसे खर्चीला चुनावी साल रहा था। एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक सात राज्यों के विधानसभा चुनाव में तमाम राजनैतिक दलों ने 753 करोड़ रुपए खर्च किए। यह खर्चा वर्ष 2004 से 2015 तक हुए कई राज्यों के विधानसभा चुनावों में सबसे ज्यादा है।
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असोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म (एडीआर) की रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2004 से लेकर 2015 तक 71 विधानसभा चुनाव हुए। वर्ष 2007 और वर्ष 2012 में सात राज्यों में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा, मणिपुर, गुजरात और हिमाचल प्रदेश चुनाव हुए थे। लेकिन अभी गुजरात और हिमाचल प्रदेश को छोड़कर बाकी के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव शुरू हो चुके हैं। सात राज्यों के वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में 13 राजनैतिक दलों ने 370 करोड़ रुपए चंदे के रूप में इकट्ठा किया और 753 करोड़ रुपए चुनाव में खर्च किया।

वहीं वर्ष 2007 में छह राजनैतिक दलों को 164 करोड़ का चंदा मिला और उन्होंने इसमें से 114 करोड़ रुपए चुनाव में खर्च किए। एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2005 में 7 दलों ने 32 करोड़, वर्ष 2006 में 8 दलों ने 24 करोड़, वर्ष 2007 में 6 दलों ने 113 करोड़, वर्ष 2008 में 12 दलों ने 199 करोड़, वर्ष 2009 में 12 दलों ने 134 करोड़, वर्ष 2010 में 9 दलों ने 66 करोड़, वर्ष 2011 में 18 दलों ने 214 करोड़, वर्ष 2012 में 13 दलों ने 753 करोड़, वर्ष 2013 में 18 दलों ने 477 करोड़, वर्ष 2014 में 23 दलों ने 446 करोड़ और वर्ष 2015 में 19 दलों ने 227 करोड़ रुपए विधानसभा चुनावों में फूंक दिए।
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वर्ष 2004 से 2015 के बीच 71 विधानसभा चुनाव हुए थे। इस दौरान 2107 करोड़ रुपए 3368 करोड़ रुपए चंदा राजनैतिक पार्टियों ने लिया। वहीं इन चुनावों में दलों ने  2728 करोड़ रुपए चुनाव में खर्च कर दिया था। गौरतलब है कि राजनैतिक पार्टियों के चंदे और खर्च का ब्यौरा चुनाव अवधि के दौरान का है। उम्मीदवार को परिणाम आने के 30 दिन और पार्टी को 75 दिन के में खर्च का ब्यौरा चुनाव आयोग को देना पड़ता है। इसके अलावा चुनाव में उम्मीदवार के खर्च की सीमा तय है लेकिन राजनैतिक दल द्वारा खर्च की कोई सीमा तय नहीं हैं।

वर्जन -
सुप्रीम कोर्ट में एडीआर ने दो पीआईएल फाइल की है। इसमें से एक पिटीशन में एडीआर ने कहा है कि राजनैतिक पार्टियों की भी चुनावी खर्च की सीमा तय होनी चाहिए। दूसरी पीआईएल में हमने मांग की है कि राजनैतिक पार्टियों से खर्च का ब्यौरा आचार संहिता की तारीख से एक साल पहले से मांगा जाए। क्योंकि इन दलों की चुनावी तैयारी चुनाव आयोग की घोषणा के कई माह पहले ही हो जाती है। लक्ष्मी भार्गवी श्रीराम, प्रोग्राम ऑफीसर, एडीआर
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2012 में प्रदेश वार खर्च का ब्यौरा (राशि खर्च में)  

election
पार्टी        - उत्तर प्रदेश     - उत्तराखंड     - पंजाब          - गोवा        - मणिपुर

भाजपा        - 29.26          - 6.57            - 1.93           - 2.71             -0.80

कांग्रेस        - 45.23          - 5.88             - 20.02         - 4.10            -0.45

बसपा        - 29.02        - उपलब्ध नहीं    - उपलब्ध नहीं    - नहीं लड़ा      - नहीं लड़ा        

सपा        - 20.61          - उपलब्ध नहीं     - उपलब्ध नहीं   - उपलब्ध नहीं    - उपलब्ध नहीं

शिओद    - नहीं लड़ा       - नहीं लड़ा         - 23.56          - नहीं लड़ा        - नहीं लड़ा
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