राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े संगठन शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास (एसएससयूएन) ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एचआरडी) में सिफारिशें भेजी हैं। इसमें कहा गया है कि स्कूलों में प्राइमरी से लेकर उच्चे क्लास तक बच्चों को निर्देश देने के लिए माततृभाषा का ही प्रयोग किया जाए। स्कूल स्तर तक भारतीय भाषाओं की जगह विदेशी भाषा को विकल्प के रूप में नहीं उपलब्ध कराए जाएं। उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर तक अंग्रेजी को अनिवार्य बनाना जरूरी नहीं है।
संगठन ने आगे लिखा है, जितने भी रिसर्ज वर्क हों वह राष्ट्र हित में हों और ऐसे प्रोजेक्ट जो इस कंडिशन के अनुरूप न हों उन्हें यूजीसी स्कॉलरशिप नहीं दे। वहीं, ऐसे तर्क जिनसे भारतीय सभ्यता, परंपरा, विचार और प्रख्यात हस्तियों का अपमान हो रहा है, उन्हें पाठ्यपुस्तकों से हटा देना चाहिए।
अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, संगठन ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय को ये सिफारिशें नई शिक्षा निति के विस्तार में की है। बताते चलें कि नई शिक्षा निति के जल्द ही लागू होने के आसार हैं।