आरएसएस के स्वयंसेवकों का नया गणवेश मथुरा में दीनदयाल धाम (फरह) में तैयार होगा। क्योंकि विजयदशमी पर होने वाले पथ संचलन में सभी स्वयंसेवक नया गणवेश पहनेंगे लिहाजा तैयारियां तेज कर दी गई हैं। आरएसएस के प्रांत मुख्यालय अगले महीने के पहले सप्ताह में कपड़ा भेज देंगे।
आरएसएस के स्वयंसेवकों का गणवेश बदल गया है। अभी तक सभी स्वयंसेवक हॉफ नेकर में रहते थे लेकिन 13 मार्च को नागौर में हुई आरएसएस की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में एलान हुआ था कि नेकर की जगह अब पैंट होगी। दशहरा से नया गणवेश लागू होने जा रहा है लिहाजा आरएसएस के सभी प्रांतीय कार्यालयों में इसे लेकर तैयारियां शुरू हो गईं हैं।
पैंट के लिए कपड़ा खरीदा जा रहा है। पैंट और शर्ट मथुरा के फरह में स्थित दीनदयाल धाम में तैयार कराई जाएगी। यहां पंडित दीनदयाल उपाध्याय जन्मभूमि स्मारक समिति की देखरेख में संचालित होने वाले सिलाई केंद्रों पर तैयारियां होने लगी हैं। इन केंद्रों से जुड़े लोगों को बाकायदा ट्रेनिंग दी जा रही है। किस तरह से गणवेश तैयार होना है इसके बारे में बताया जा रहा है।
जन्मभूमि स्मारक समिति के मंत्री नवीन मित्तल ने बताया कि सिलाई केंद्रों के माध्यम से करीब दो सौ महिलाओं को रोजगार दिया गया है। यह सभी गणवेश तैयार करेंगी। कपड़ा क्षेत्रीय कार्यालय से उपलब्ध कराया जाता है। माना जा रहा है कि सितंबर के पहले सप्ताह में कपड़ा पहुंच जाएगा।
पहले चरण में पचास हजार से भी ज्यादा स्वयंसेवकों का गणवेश यहां तैयार होगा। मेरठ, ब्रज, कानपुर, अवध (लखनऊ), काशी (वाराणसी), गोरखपुर, जयपुर और उत्तराखंड के आरएसएस मुख्यालय नई ड्रेस के लिए कपड़ा उपलब्ध कराएंगे। हालांकि नया गणवेश बाजार में भी तैयार होता है लेकिन दीनदयाल धाम में तैयार होने वाली ड्रेस बाजार के मुकाबले सस्ती पड़ेगी।