मथुरा के कृष्णानगर डाकघर में हुए घपले का मास्टरमाइंड हर महीने 27000 रुपये की किस्तें जमा कर रहा है। नौ लाख का लोन है जिसकी हर महीने 10000 रुपये किस्त जाती है। आरडी के खाते में 15 हजार रुपये प्रतिमाह जमा करता है। डाकघर की पीएलआई में 2550 रुपये जमा किए जा रहे हैं।
जांच में कुछ और भी खातों का पता चला है जिनकी पड़ताल की जा रही है। कृष्णानगर डाकघर से 76.08 लाख की मोटी रकम का गोलमाल करने वाला लिपिक सचिन अग्रवाल की जितनी तनख्वाह है उतनी तो वह किस्तें ही दे रहा है। अब सवाल यह उठता है कि आखिर परिवार के खर्च का पैसा कहां से आ रहा था।
15 हजार रुपये प्रतिमाह की किस्त वाली आरडी उसे एजेंट पीके अग्रवाल, किशन सिंह और ब्रजमोहन के माध्यम से खुलवाई थी। इसके अलावा पोस्टल लाइफ इंश्योरेंस में 2550 रुपये की किश्त जमा करता है। पोस्टल कोआपरेटिव सोसायटी आगरा से ढाई साल पहले नौ लाख रुपये का लोन लेने वाला लिपिक सचिन प्रतिमाह करीब 10 हजार रुपये की किश्त भरता है।
इस लोन में डिवीजनल आफिस के बाबू श्याम लाल चौधरी और सिस्टम मैनेजर मनीष सिंह ने गारंटी दी है। सरकारी संपत्ति को 76.08 लाख रुपये का चूना लगाने वाले लिपिक ने करीब छह लाख का और चूना लगा दिया है। यह रकम लोन में ली गई है। अभी तक विभाग और पुलिस की पकड़ से दूर लिपिक से 82 लाख रुपये की रिकवरी करना भी बड़ा सवाल है।