अरुण कुमार ने कहा, आतंकियों ने जब हिंदुओं के घाटी छोड़ने के बाद मुस्लिमों को निशाना बनाना शुरू किया तब संघ ने मुस्लिमों की मदद के लिए सेवाएं देना शुरू किया।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने 1990 में सिर्फ कश्मीरी हिंदुओं की ही नहीं बल्कि मुस्लिमों की भी मदद की थी।
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संघ के वरिष्ठ नेता अरुण कुमार ने शुक्रवार को कहा, 1990 में जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद चरम पर था। उस वक्त संघ सरकार पर घाटी को सेना को सौंपने, कश्मीर के लोगों को बचाने के लिए राष्ट्रव्यापी जागरूकता कायम करने जैसे विभिन्न पहुलओं पर काम कर रहा था।
अरुण कुमार ने कहा, आतंकियों ने जब हिंदुओं के घाटी छोड़ने के बाद मुस्लिमों को निशाना बनाना शुरू किया तब संघ ने मुस्लिमों की मदद के लिए सेवाएं देना शुरू किया। संघ के संयुक्त महासचिव अरुण कुमार ‘कॉन्फिल्क्ट रिजॉल्यूशन द आरएसएस वे’ पुस्तक के अनावरण कार्यक्रम में बोल रहे थे।
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उन्होंने कहा, आजादी के बाद से संघ के खिलाफ एक गलत धारणा कायम कर दी गई है कि यह फासीवादी और हिंदु उग्रवादी संगठन है। ऐसा ही एक पारिस्थितिकी तंत्र अभी भी संघ के बारे में गलत जानकारी फैला रहा है।
इसके बावजूद संघ जम्मू-कश्मीर, पंजाब और उत्तर पूर्व में संघर्षों को खत्म करने के लिए काम कर रहा है। कुमार ने कहा, ऐसा इस लिए क्योंकि संघ समाज के मतभेदों को संघर्ष के तौर पर नहीं देखता है। हमने कभी भी विविधता को विभाजन नहीं माना। हमने कभी इसे समाज को बाटने का कारण नहीं समझा। संघ ने हमेशा विविधता में एकता को ही देखा। यही हमारी मूल धारणा है।