केरल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की समन्वय बैठक में पश्चिम बंगाल में महिला डॉक्टर के साथ हुई दरिंदगी का मुद्दा भी उठा। संघ ने कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज की घटना की निंदा करते हुए इसे 'बहुत दुर्भाग्यपूर्ण' बताया गया। आरएसएस समन्वय बैठक में महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में त्वरित न्याय में तेजी लाने के लिए कानूनों और दंडात्मक कार्रवाई की समीक्षा की मांग की। केरल के पलक्कड़ में तीन दिवसीय समन्वय बैठक के अंतिम दिन संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने कहा कि पश्चिम बंगाल की हालिया घटनाओं के चलते राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने पर संघ सहमत नहीं है।
पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन के पक्ष में नहीं है संघ
गौरतलब है कि कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में 31 वर्षीय महिला डॉक्टर के साथ दुष्कर्म और हत्या की जघन्य वारदात के बाद बड़े पैमाने पर प्रदर्शन और हिंसा की तस्वीरें सामने आई हैं।पश्चिम बंगाल में विपक्षी दल भाजपा ने कानून-व्यवस्था ध्वस्त होने का दावा करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। इन हालिया घटनाओं के आधार राष्ट्रपति शासन लगाने के सवाल पर सुनील आंबेकर ने कहा कि, यह फैसला सरकार को लेना है, लेकिन संघ इससे सहमत नहीं है। राष्ट्रपति शासन सरकार को अस्थिर करने का बहुत लोकतांत्रिक तरीका नहीं है। हालांकि, उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक सरकार को कानून के अनुसार शासन करने और जनता की शिकायतों का समाधान करने के लिए जनता के प्रति जवाबदेह होना चाहिए।
खुद से जुड़े संगठनों के बीच समन्वय की कमी की बातें बेबुनियाद
केरल में पहली बार हुई संघ की तीन दिवसीय अखिल भारतीय समन्वय बैठक के बाद संघ पदाधिकारी सुनील आंबेकर ने भाजपा समेत खुद से संगठनों के बीच समन्वय की कमी को खारिज किया। संगठन ने कहा कि संघ अगले साल अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे कर रहा है। इसके बावजूद वह अपने मूल सिद्धांत राष्ट्र प्रथम के प्रति प्रतिबद्ध है। आंबेडकर ने भाजपा समेत संघ से जुड़े अन्य संगठनों के बीच समन्वय की कमी संबंधी सवाल का जवाब दिया। कहा कि संघ 2026 में 100वीं वर्षगांठ पूरी करने जा रहा है। यह एक लंबी यात्रा है। इस यात्रा में एक बात जो निरंतर बनी रही, वह है राष्ट्र प्रथम के प्रति प्रतिबद्धता। एक लंबी यात्रा में कामकाज से संबंधित कुछ मसलों पर भिन्नता उत्पन्न होती हैं लेकिन संगठन के पास इन मुद्दों को हल करने के लिए एक तंत्र है। हमारी औपचारिक और अनौपचारिक दोनों तरह की बैठकें नियमित रूप से होती रहती हैं। एजेंसी
नड्डा के बयान पर कहा-परिवार का मामला
आंबेकर से भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के लोकसभा चुनाव के दौरान दिए उस बयान के बारे में पूछा गया जिसमें उन्होंने कहा कि पार्टी उस दौर से काफी आगे बढ़ चुकी हैं, जब उसे संघ की जरूरत थी और अब वह अपना काम खुद संभालने में सक्षम है। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि अन्य मुद्दों का समाधान किया जाएगा। यह पारिवारिक मामला है। परिवार में सब कुछ ठीक होने पर उन्होंने कहा कि बिल्कुल।
भागवत, नड्डा समेत 300 से अधिक लोगों ने किया मंथन
संघ की समन्वय बैठक में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले, विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष आलोक कुमार, भाजपा अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा, महामंत्री संगठन बीएल संतोष समेत 32 संघ से जुड़े विविध संगठनों के राष्ट्रीय पदाधिकारी सहित करीब 300 कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
तमिलनाडु में धर्मांतरण गतिविधियां चिंताजनक
अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख ने कहा कि तमिलनाडु में धर्मांतरण गतिविधियां चिंताजनक हैं। ईसाई मिशनरियों की धर्मांतरण की गतिविधियों को गंभीरता से लिया गया है। उन्होंने कहा कि कई संगठनों ने राज्य में ईसाई मिशनरियों की धर्मांतरण संबंधी गतिविधियों के बढ़ने को लेकर शिकायत और रिपोर्ट दी है।
nमणिपुर में बहाल होगी शांति : हिंसाग्रस्त मणिपुर पर आंबेकर ने कहा कि संघ प्रमुख मोहन भागवत पहले ही इस बारे में बोल चुके हैं और सरकार से त्वरित कार्रवाई करने का आग्रह कर चुके हैं। हमारी राज्य के हालात पर नजर है। उन्होंने उम्मीद जताई कि स्थिति को प्रभावी ढंग से सुलझा लिया जाएगा और मणिपुर में शांति बहाल हो जाएगी।
पिछले साल 472 महिला सम्मेलन आयोजित किए गए
संघ की बैठक में महिला सुरक्षा को लेकर पांच मोर्चों पर चर्चा की गई, जिसमें कानूनी, जागरूकता, संस्कार, शिक्षा और आत्मरक्षा शामिल है। इन मोर्चों को लेकर महिला सुरक्षा के लिए संघ द्वारा देशभर में अभियान चलाया जाएगा। संघ की बैठक में बताया गया कि पिछले साल संघ ने राज्य और जिले में 472 महिला सम्मेलन आयोजित किए गए। जिसमें महिलाओं के मुद्दों, पश्चिमी फेमिनिज्म और भारतीय चिंतन पर चर्चा की गई। आरएसएस की बैठक में बंगाल, वायनाड और तमिलनाडु में हुई घटनाओं पर भी चिंता जाहिर की गई। बैठक में बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा को लेकर भी चिंता जताई गई और सरकार से इन मामलों में कदम उठाने का आग्रह किया।
जातीय जनगणना पर संघ ने कही ये बात
संघ की समन्वय बैठक में जातीय जनगणना के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। संघ ने जातीय जनगणना को संवेदनशील मुद्दा बताते हुए कहा कि जातीय जनगणना संवेदनशील विषय है। इससे समाज की एकता और अखंडता को खतरा हो सकता है। पंच परिवर्तन के तहत की गई इस चर्चा में संगठन ने फैसला किया है कि व्यापक पैमाने पर समरसता को बढ़ावा देने के लिए काम किया जाएगा। यह राष्ट्रीय एकीकरण के लिए महत्वपूर्ण है। संघ ने कहा कि जातीय जनगणना का इस्तेमाल चुनाव प्रचार और चुनावी उद्देश्यों के लिए नहीं किया जाना चाहिए बल्कि कल्याणकारी उद्देश्यों के लिए और खासतौर पर दलित समुदाय की संख्या जानने के लिए सरकार उनकी गणना कर सकती है।