संघ से जुड़े सूत्रों का कहना है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हिजाब और हलाल जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बैक-टू-बैक सैंपल पोल के बावजूद आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत को लेकर सोच विचार की स्थिति में है। आरएसएस के इस दो दिवसीय चिंतन शिविर में कर्नाटक विधानसभा चुनाव की रणनीति समेत कई मुद्दों पर चर्चा करेगा...
कर्नाटक में 2023 विधानसभा चुनाव को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। एक तरफ जहां भाजपा संगठन लगातार वहां सक्रिय होकर काम रहा है। वहीं, अब दूसरी तरफ पर्दे के पीछे से आरएसएस भी एक्टिव हो गया है। 14 और 15 जुलाई को प्रदेश की राजधानी बेंगलुरु में संघ दो दिवसीय चिंतन शिविर आयोजित करने जा रहा है। इसमें राज्य के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नलिन कुमार कतील भी शामिल हो सकते हैं।
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संघ से जुड़े सूत्रों का कहना है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हिजाब और हलाल जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बैक-टू-बैक सैंपल पोल के बावजूद आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत को लेकर सोच विचार की स्थिति में है। आरएसएस के इस दो दिवसीय चिंतन शिविर में कर्नाटक विधानसभा चुनाव की रणनीति समेत कई मुद्दों पर चर्चा करेगा। बैठक में इस बात पर भी चर्चा होगी कि राज्य में सत्ता बनाए रखने और चुनाव जीतने के लिए सरकार, पार्टी, नेताओं और आरएसएस को क्या भूमिका निभानी चाहिए। बैठक में रोहित चक्रतीर्थ समिति की पाठ्यपुस्तकों और इसके निहितार्थों में संशोधन के मुद्दे पर भी चर्चा संभव है, क्योंकि प्रसिद्ध लेखक देवनूर महादेवा की आरएसएस पर लिखी हाल की पुस्तक ने संगठन की आलोचना की गई है।
सूत्रों ने आगे बताया कि आरएसएस के इस संभावित चिंतन शिविर में विभिन्न मुद्दों पर भ्रम को दूर करने और चुनावों के मद्देनजर भाजपा कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारियों, विशेष रूप से बोर्डों और निगमों में भर्ती के लिए किए जाने वाले उपचारात्मक उपायों पर चर्चा की जाएगी। इस चिंतन शिविर में आरएसएस के अन्य नेताओं, केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी और भाजपा कर्नाटक प्रभारी अरुण सिंह के शामिल होने की संभावना है।