जम्मू-कश्मीर में सेना पर हमलों की बढ़ती संख्या ने संघ को भी चिंता में डाल दिया है। सेना की शहादत को देश के सम्मान और राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर बड़ा सियासी मुद्दा बनाने वाला भगवा परिवार अब खुद कटघरे में घिरता नजर आ रहा है। जम्मू-कश्मीर में आतंकियों की ओर से न सिर्फ सेना के जवानों पर होने वाली घटनाओं में बढ़ोत्तरी हुई है। बल्कि पाकिस्तान की ओर से आए दिन सीजफायर के मामलों में भी बढ़ोत्तरी नजर आ रही है।
अमृतसर में जुटेंगे संघ से जुड़े कुछ प्रमुख चिंतक
पाक आतंकियों के जरिए सेना के जवानों की बढ़ रही शहादत की संख्या ने भगवा परिवार को चिंता में डाल दिया है। तो केंद्र सरकार और भाजपा भी इस मामले में बैकफुट पर है। जबकि लोकसभा चुनाव 2014 से पहले पीएम मोदी समेत भाजपा के तमाम नेता यूपीए पर आतंक के खिलाफ सॉफ्ट नीति अपनाने का आरोप लगाते हुए पाक को मुंहतोड़ जवाब देने की वकालत करते थे। मगर केंद्र और प्रदेश में उसकी सरकार होने के बावजूद भी सैनिकों की शहादत का क्रम जारी है। इसे लेकर भगवा कार्यकर्ताओं का मनोबल भी गिरा हुआ है। आने वाले चुनावों में कार्यकर्ताओं का मनोबल भाजपा के चुनावी मंसूबों पर पानी न फेर दे इससे बचने के लिए संघ ने चिंतन मनन शुरू कर दिया है।
24 से 25 फरवरी तक अमृतसर में चुनिंदा लोगों संग मंत्रणा करेंगे इंद्रेश
राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच के जरिए देश की सुरक्षा को लेकर सक्रिय संघ के अखिल भारतीय कार्यकारीणी के सदस्य इंद्रेश कुमार ने संघ से जुड़े कुछ चुनिंदा चिंतकों की दो दिवसीय बैठक अमृतसर में बुलाई है। बैठक को बेहद गोपनीय और अनौपचारिक रखा गया है। देशभर से मात्र 17 से 18 चुनिंदा लोगों को ही इंद्रेश ने बैठक में बुलाया है।
बैठक में शामिल होने जा रहे प्रज्ञा प्रवाह के एक अधिकारी ने अमर उजाला को बताया कि 24 से 25 फरवरी को अमृतसर में होने वाली इस बैठक में पाकिस्तान के नापाक हरकतों से जम्मू-कश्मीर में उपजे हालातों के अलावा सैन्य जवानों के शहादत की बढ़ रही संख्या पर मंत्रणा होगी। उक्त अधिकारी के अनुसार बैठक बेहद गोपनीय है। इसलिए चुनिंदा लोगों को ही आंमत्रित किया गया है। इसके बाद संघ के कुछ शीर्ष अधिकारियों की टोली बैठक 27 से 28 फरवरी को दिल्ली में होनी है।