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हैदराबाद हैवानियत पर संघ प्रमुख ने जताई चिंता, कहा मातृशक्ति की रक्षा जरूरी

Sun, 01 Dec 2019 09:11 PM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • संघ प्रमुख ने जताई चिंता कहा मातृशक्ति की रक्षा जरूरी
  • हरिवंश बोले घटना से हतप्रभ, आई निर्भया कांड की याद
  • इमाम संगठन के मुखिया बोले आरोपियों को लगे सार्वजनिक फांसी
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RSS chief Mohan Bhagwat - फोटो : ANI
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विस्तार
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हैदराबाद में पशु चिकित्सक से हैवानियत मामले में देश में गम और गुस्सा बढ़ रहा है। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने इस घटना पर चिंता जाहिर करते हुए घर से बाहर मातृशक्ति की रक्षा को जरूरी बताया तो राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह ने इस घटना की तुलना निर्भया कांड से करते हुए कहा कि खबर पढ़ कर उनके रोंगटे खड़े हो गए।

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अखिल भारतीय इमाम संगठन के मुखिया उमर अहमद इलियासी ने गीता महोत्सव से जुड़े एक कार्यक्रम में संघ प्रमुख, लोकसभा अध्यक्ष एवं कई केंद्रीय मंत्रियों के सामने इस मामले के आरोपियों को सरेआम फांसी पर लटकाने की वकालत की।

संघ प्रमुख भागवत ने गीता महोत्सव से जुड़े एक कार्यक्रम में हैदराबाद की घटना पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि मातृशक्ति की  रक्षा के लिए यह नारे लगाने का समय नहीं है। हमें मातृशक्ति के प्रति अपनी दृष्टि में बदलाव लाना होगा। घर, परिवार और समाज में मातृशक्ति के प्रति सम्मान का भाव पैदा करना होगा। भागवत ने कहा कि घर से बाहर महिलाओं की सुरक्षा जरूरी है। इसके लिए समाज व्यापक सुधार और बदलाव की जरूरत है। महिलाओं को देखने की दृष्टि साफ होनी चाहिए। हमें घर, परिवार और समाज में ही लोगों को इस आशय का प्रशिक्षण देना होगा।
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इसी कार्यक्रम में इलियासी ने हैदराबाद की घटना पर नाराजगी और दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार ऐसी घटनाओं में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है, उसे रोकने केलिए कड़ा संदेश देने की जरूरत है। कड़ा संदेश देने के लिए सामुहिक दुष्कर्म के आरोपियों को सार्वजनिक रूप से मौत की सजा दी जानी चाहिए।

राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह ने कहा कि पीड़िता के प्रति बरती गई हैवानियत ने दिल्ली के निर्भया कांड की याद दिला दी। खबर पढ़ कर मेरे रोंगटे खड़े हो गए। मैं अंदर से बुरी तरह हिल गया। हमें सोचना होगा कि एक समाज के तौर पर  हम कहां जा रहे हैं। उन्होनें कहा कि हमें इस बात पर शर्मिंदा होना चाहिए कि एक अपनी बेटियों को एक सुरक्षित समाज देने में असफल रहे हैं। जैसा कि गांधीजी ने कहा था कि हमारे समाज में चरित्र निर्माण पर जोर देने की काफी ज्यादा जरूरत है। हमें एक ऐसे समाज को बनाने पर जोर देना चाहिए जो हर तरह के लालच से दूर हो।

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