अखिल भारतीय प्रतिनिधियों के अतिरिक्त संघ के अन्य संगठन भी हैं। इनमें से विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) को सबसे बड़ा संगठन माना जाता है, जिसमें करीब 40 प्रतिनिधि होते हैं। संघ के सभी पूर्व प्रचारक (राज्य के नेताओं) को एबीपीएस के लिए आमंत्रित किया जाता है। आम तौर पर भाजपा अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष और महासचिव की बैठक में प्रतिनिधित्व करती है।
बता दें कि कोयंबटूर में पिछले साल की एबीपीएस बैठक में सरकार्यवाह सुरेश भैय्याजी जोशी द्वारा प्रस्तुत वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, आरएसएस का काम अब भारत में 59,136 स्थानों पर पहुंच गया है। यानि आसएसएस की देशभर में लगभग 60 हजार शाखाएं प्रतिदिन लगती हैं।
बता दें कि संघ में शीर्ष पद सरसंघचालक (अध्यक्ष) का होता है और इस पद पर मोहन भागवत काबिज हैं। जिनकी भूमिका संगठन को दिशानिर्देश देना है। जबकि सरकार्यवाह सहयोगी संगठनों से तालमेल से लेकर महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियां करने जैसे रोजमर्रा के फैसले लेते हैं। उनका कार्यकाल तीन साल का होता है, जिसे प्रतिनिधि सभा जितनी बार चाहे बढ़ा सकती है।
सत्तर साल के भैयाजी लगातार तीन बार से सरकार्यवाह हैं, लेकिन पिछले कुछ समय से अस्वस्थ हैं। इसीलिए उन्होंने जिम्मेदारी से मुक्त होने की इच्छा जताई है। कर्नाटक के मूल निवासी दत्तात्रेय अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के लंबे समय तक प्रभारी रहे।
63 वर्षीय दत्तात्रेय संघ के युवा कार्यकर्ताओं में बेहद लोकप्रिय हैं। उनकी खास पहचान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी निकटता भी है। यूपी में भाजपा की अभूतपूर्व जीत और योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनवाने तक में दत्ता की अहम भूमिका थी।